20 और 30 की उम्र के लोगों में दिल की धड़कन का अनियमित होना तेज़ी से आम होता जा रहा है। जानिए आपको डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए।

पहले दिल की बीमारियों का पता 50 या 60 साल की उम्र के आस-पास चलता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। खबरों के मुताबिक, ज़्यादा से ज़्यादा लोग 20 और 30 साल की उम्र में ही दिल की समस्याओं, जैसे कि दिल की धड़कन का अनियमित होना, का सामना कर रहे हैं।

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी की क्लिनिकल हेड और सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट व कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. वनिता अरोड़ा इसके पीछे की वजह बताती हैं।

20 और 30 की उम्र में दिल की धड़कन का अनियमित होना
डॉ. वनिता के अनुसार, नियमित जांच से इसके मामलों का पता चलने में बढ़ोतरी की आंशिक वजह तो पता चलती है, लेकिन स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल करने वाले लोग भी इसमें योगदान देते हैं क्योंकि ये डिवाइस दिल की गतिविधि को रिकॉर्ड करते हैं। डॉ. वनिता ने आगे कहा, "अब दिल की अनियमित धड़कन का पता चल जाता है और संभावित इलाज के लिए इसे डॉक्टर के पास ले जाया जाता है।"

स्टिमुलेंट्स (उत्तेजक पदार्थों) का सेवन

डॉक्टरों का कहना है कि बीमारियों का बेहतर पता चलना और लोगों में जागरूकता ही एकमात्र कारण नहीं हैं। कार्डियोलॉजिस्ट इसके लिए स्टिमुलेंट्स (उत्तेजक पदार्थों) के ज़्यादा सेवन को ज़िम्मेदार मानते हैं। डॉ. वनिता ने कहा, "एनर्जी ड्रिंक्स, ज़्यादा कैफ़ीन लेना और मनोरंजन के लिए ड्रग्स का इस्तेमाल करना, इनमें से कुछ स्टिमुलेंट्स हैं। निकोटीन भी, जो इन्हीं स्टिमुलेंट्स जैसा है, दिल की धड़कन को अनियमित कर सकता है।" शराब का सेवन भी चिंता का विषय है। शराब पीने से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, ऐसा देखा गया है।

खराब नींद और तनाव
खराब नींद और लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी दिल की सेहत पर असर डालते हैं। डॉ. वनिता ने बताया कि युवा लोग ऐसी नौकरियों में लंबे समय तक काम कर सकते हैं जिनमें काम और घर के शेड्यूल अनियमित होते हैं। इस तरह की जीवनशैली में लंबे समय तक ज़्यादा तनाव, खराब नींद और दिल की खराब सेहत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

थायराइड की समस्याएं

कुछ समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं और उनके साफ़ लक्षण दिखाई नहीं देते। डॉ. वनिता के अनुसार, थायराइड की वजह से भी दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर और जन्म से मौजूद दिल की बनावट संबंधी कमियां भी इन समस्याओं से जुड़ी हो सकती हैं।

डॉ. वनिता ने बताया, "दिल की धड़कन का अचानक तेज़ होना और फिर अचानक सामान्य हो जाना, या दिल में फड़फड़ाहट महसूस होना (जो कई बार हो और कुछ सेकंड या उससे ज़्यादा समय तक चले) और साथ ही चक्कर आना, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ़ जैसे लक्षण दिखना—ये सभी गंभीर मामले हैं।"

ऐसे मामलों में लक्षण दिखने पर ECG करवाना और कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) को दिखाना ज़रूरी है। धड़कन की समस्या के गंभीर होने और लक्षण ज़्यादा बढ़ जाने का इंतज़ार करने के बजाय, समय रहते इसका इलाज करवाना ज़्यादा फ़ायदेमंद और किफायती होगा।

पाठकों के लिए सूचना: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी चिकित्सीय स्थिति के बारे में कोई भी सवाल होने पर हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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