20 साल की सिया गोयल और 22 साल के चेतन चौधरी पर 18 जून को लोनावला के पास लोहागढ़ किले में ट्रेकिंग के दौरान पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है।

पुणे के बिल्डर केतन अग्रवाल की मौत के दिन, हत्या के आरोपी 22 साल के चेतन चौधरी का जान-बूझकर 640 मिनट तक ऑफ़लाइन रहना पुलिस की जांच में एक अहम सुराग साबित हुआ है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी वजह से उन्हें हत्या की साज़िश में उसकी कथित भूमिका का पता लगाने में मदद मिली।

महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली 20 साल की सिया गोयल पर अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या का आरोप है। आरोप है कि उसने चेतन चौधरी — जिसके साथ उसके कथित तौर पर रिश्ते थे — की मदद से 18 जून को लोनावला के पास लोहागढ़ किले की ट्रेकिंग के दौरान केतन को एक चट्टान से धक्का देकर मार डाला।

पुलिस का कहना है कि चेतन ने 18 जून को सुबह करीब 7 बजे अपने मोबाइल का इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दिया था और शाम 5:40 बजे तक ऑफ़लाइन रहा। जांच करने वालों का दावा है कि उसने जान-बूझकर अपना फ़ोन अपनी दुकान पर छोड़ दिया और अपने एक कर्मचारी का मोबाइल फ़ोन साथ ले गया ताकि पुलिस उसकी लोकेशन का पता न लगा सके।

हालांकि, यह चाल उल्टी पड़ गई। पुलिस ने कहा कि डिजिटल नेटवर्क से चेतन का करीब 640 मिनट तक गायब रहना ही शक की वजह बना।

चेतन के पास आने वाली हर कॉल की जांच की गई
इसके बाद जांच करने वालों ने उस दौरान चेतन के फ़ोन पर आई हर कॉल की बारीकी से जांच की। पुलिस के मुताबिक, सभी कॉलर ने एक जैसी बात बताई - हालांकि उनकी कॉल का जवाब तो दिया गया, लेकिन वे असल में कभी चेतन से बात नहीं कर पाए। इसके बजाय, उसकी दुकान पर काम करने वाले कर्मचारियों ने कॉल का जवाब दिया।

बुधवार को पुलिस ने उस कर्मचारी को थाने बुलाया और उसका बयान दर्ज करना शुरू किया।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी जांच की। पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, इन रिकॉर्ड्स से दोनों के बीच हुई बातचीत का पता चला और जांचकर्ताओं को उनके कथित गुप्त रिश्ते का खुलासा करने में मदद मिली।

जांच में शामिल एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि 1 जनवरी से 18 जून के बीच सिया और चेतन ने फ़ोन पर 2,004 बार बात की। जांच में यह भी पता चला कि इन दोनों ने लगभग छह महीने की इस अवधि में एक-दूसरे से बात करने में कुल 238 घंटे बिताए।

सिया और चेतन के बीच 2,004 कॉल
लोनावला रूरल पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर और इस मामले के जांच अधिकारी दिनेश तायडे ने कहा, "दोनों आरोपियों के CDR डेटा का विश्लेषण करने के बाद हमें पता चला है कि उनके बीच 2,004 से ज़्यादा कॉल हुए थे, यानी औसतन हर दिन लगभग 8-10 कॉल।"

अधिकारी ने यह भी पुष्टि की कि केतन अग्रवाल की हत्या के बाद भी सिया और चेतन के बीच कॉल और मैसेज का सिलसिला जारी रहा। पुलिस हत्या के पीछे की कथित साज़िश की जांच कर रही है और कई अन्य सबूतों के साथ-साथ कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने कहा, "हां, हमें सिया और उसके बॉयफ्रेंड के बीच हुई बातचीत और चैट्स मिली हैं, और उस डेटा की आगे जांच चल रही है।"

सिया और केतन की सगाई फरवरी में हुई थी और उनकी शादी इस साल नवंबर में होनी थी। पुलिस को शक है कि सिया अरेंज मैरिज नहीं करना चाहती थी, लेकिन वह अपने परिवार को अपने सीक्रेट रिश्ते के बारे में खुलकर नहीं बता पा रही थी। उसे डर था कि सगाई तोड़ने और चेतन के साथ भागने से परिवार की बदनामी होगी और समाज में उनकी इज्ज़त पर आंच आएगी।

मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा, "सामाजिक दबाव और परिवार की इज्ज़त को देखते हुए, उसके पास चेतन के साथ भागने का कोई विकल्प नहीं था। इसलिए, उसने शायद कोई बीच का रास्ता निकालने का फैसला किया होगा ताकि वह केतन से शादी भी न करे और परिवार का सम्मान भी बना रहे।"

सगाई तोड़ने के बजाय, सिया ने कथित तौर पर अपने मंगेतर को रास्ते से हटाने के लिए चेतन के साथ मिलकर साज़िश रची। पुलिस का दावा है कि दोनों ने मिलकर केतन की हत्या की साज़िश रची और उसे अंजाम दिया। शुरुआत में इसे 18 जून को लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के दौरान गलती से गिरने से हुई मौत के तौर पर पेश किया गया था।

फोन पर हत्या के तरीके खोजे
पुणे ग्रामीण पुलिस के सूत्रों ने पुष्टि की है कि सिया और चेतन ने कथित तौर पर अपने मोबाइल फोन पर अपराध से जुड़े कई तरीके खोजे थे। हालांकि सिया सिर्फ़ 20 साल की थी, लेकिन पुलिस का दावा है कि वह अपनी योजना बनाने में बहुत चालाक थी और उसने इस साज़िश को अंजाम देने के लिए लोहागढ़ किले को चुना था। पुलिस के मुताबिक, वह केतन पर बार-बार किले जाने का दबाव डालती रही। पुलिस ने कहा कि उसे पूरा भरोसा था कि हत्या का राज़ कभी नहीं खुलेगा।

हालांकि, केतन की मौत के बाद और उसके अंतिम संस्कार के दौरान उसके संदिग्ध व्यवहार ने उसे अग्रवाल परिवार की नज़रों में ला खड़ा किया।

केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा, "जब शव मिला और परिवार के सभी सदस्य सदमे में थे, तब सिया बिल्कुल सामान्य व्यवहार कर रही थी; इस बात पर सबसे पहले मेरी बेटी का ध्यान गया।"

उन्होंने यह भी दावा किया कि जब परिवार गहरे सदमे में था और ठीक से सोच-समझ नहीं पा रहा था, तब सिया दुर्घटना वाली जगह पर पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर रही थी और आगे की कार्रवाई व प्रक्रियाओं के बारे में पूछ रही थी।

अग्रवाल ने कहा, "हो सकता है कि वह अपनी अगली चाल की तैयारी कर रही हो; इसीलिए वह पुलिस की आगे की कार्रवाई और प्रक्रिया के बारे में पूछ रही थी।"

विशाल अग्रवाल ने यह भी दावा किया कि चेतन की बहन सिया की करीबी दोस्त थी, जिससे संकेत मिलता है कि परिवार के सदस्यों को शायद सिया के रिश्ते के बारे में पता था।

चेतन के परिवार ने आरोपों को नकारा

इस बीच, चेतन चौधरी के पिता बाबूलाल चौधरी ने अपने बेटे पर लगे आरोपों को गलत बताया और दावा किया कि उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "चेतन ने मुझे बताया था कि वह किले में उनसे दूर रह रहा था। उसे तथाकथित अमीर लोग फंसा रहे हैं। सिया और चेतन अच्छे दोस्त थे, और खुद को बचाने के लिए उसने मेरे बेटे को फंसा दिया।"

वहीं, पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान सिया ने पुलिस को बताया कि वह केतन अग्रवाल के साथ अपनी सगाई से खुश नहीं थी। पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, सिया ने दावा किया कि उसने केतन को बता दिया था कि वह यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ाना चाहती और उससे कहा था कि तय शादी को आगे न बढ़ाए। हालांकि, उसने आरोप लगाया कि केतन ने रिश्ता बनाए रखने की कोशिश जारी रखी और उसकी आपत्तियों के बावजूद शादी की तैयारियों में लगा रहा।

पुलिस इस मामले की चल रही जांच के तहत इन दावों की पुष्टि कर रही है।

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