2000–2005: अस्थिरता से सुशासन की ओर – जब बिहार ने बदलनी शुरू की अपनी तकदीर
बिहार की राजनीति का यह कालखंड, 2000 से 2005, राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन प्रयोगों, और अंततः “सुशासन” के बीज रोपण का दौर था। यह वही समय था जब लालू युग के…
बिहार की राजनीति का यह कालखंड, 2000 से 2005, राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन प्रयोगों, और अंततः “सुशासन” के बीज रोपण का दौर था। यह वही समय था जब लालू युग के…
1995 का बिहार चुनाव राज्य की राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था।यह सिर्फ सत्ता की पुनरावृत्ति नहीं थी , यह लालू युग की पुनर्पुष्टि थी, जब जनता दल…
1990 का बिहार विधानसभा चुनाव एक चुनाव नहीं, बल्कि सत्ता के सामाजिक ढांचे में क्रांति थी। पहली बार बिहार की राजनीति का केंद्र बदल गया — पटना के सत्ता गलियारों…
1985 का बिहार विधानसभा चुनाव राजनीतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक मोड़ था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में फैली संवेदनशीलता और सहानुभूति की लहर ने कांग्रेस को एक…
1977 की जनता लहर के बाद 1980 का बिहार चुनाव एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल और जनभावनाओं के संघर्ष का गवाह बना। जनता पार्टी की अंदरूनी कलह और अस्थिर शासन…
भय से स्वतंत्रता की ओर — बिहार में लोकतंत्र का पुनर्जागरण 1977 का बिहार विधानसभा चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं था — यह लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का उत्सव था।…
अव्यवस्था का वर्ष: जब बिहार सत्ता के मोर्चे पर अस्थिर हो गया 1969 का बिहार विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीतिक अस्थिरता का प्रतीक बन गया। कुल 318 सीटों पर हुए…
परिवर्तन की आंधी: जनता ने किया इतिहास 1967 का वर्ष बिहार की राजनीति में निर्णायक मोड़ लेकर आया। कुल 318 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में दशकों से सत्ता में…
जब बिहार में विचारधाराओं का संग्राम शुरू हुआ 1962 का बिहार विधानसभा चुनाव एक साधारण राजनीतिक घटना नहीं था, बल्कि यह एक वैचारिक जागरण का दौर था। कुल 264 सीटों…
लोकतंत्र का दूसरा अध्याय 1957 में बिहार ने अपने लोकतांत्रिक सफर का दूसरा चरण तय किया। कुल 318 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ और जनता ने कांग्रेस को पुनः भारी…