वो जिन्होंने विज्ञापन नहीं, भारत की आत्मा लिखी — शब्दों के साधक पीयूष पांडे को अंतिम प्रणाम
कभी कोई इतना गहरा लिख गया कि उसके शब्द केवल सुने नहीं, जीए गए । कभी किसी ने इतना सादा कहा कि उसकी आवाज़ हर घर की गूंज बन गई।…
कभी कोई इतना गहरा लिख गया कि उसके शब्द केवल सुने नहीं, जीए गए । कभी किसी ने इतना सादा कहा कि उसकी आवाज़ हर घर की गूंज बन गई।…