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अनंत-सूरजभान के बीच रसगुल्ले वाली सियासी जंग, जेल में राजा, मैदान में जलसा

चुनाव नतीजे से पहले ही मोकामा में दावत का संग्राम बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही मोकामा में सियासत अपने चरम पर है। इस बार मुकाबला केवल…

बिहार चुनाव 2025: रिज़ल्ट से पहले सियासत उफान पर, नीतीश की पूजा, बीजेपी के लड्डू , RJD का पलटवार और पप्पू यादव का दावा

आस्था और आत्मविश्वास का मेल, महावीर मंदिर पहुंचे नीतीश कुमार पटना की सुबह बुधवार को राजनीति से ज्यादा धार्मिक माहौल में बदली, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक महावीर मंदिर पहुंच…

2025 – बिहार का निर्णायक मोड़: परिवर्तन या निरंतरता की आख़िरी परीक्षा

2025 का बिहार विधानसभा चुनाव सिर्फ़ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राज्य की नई दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। यह चुनाव बिहार के राजनीतिक, सामाजिक…

2010 – बिहार में सुशासन की गूंज: नीतीश कुमार की ऐतिहासिक जीत और नए युग की शुरुआत

बिहार की राजनीति के लंबे इतिहास में 2010 का विधानसभा चुनाव एक निर्णायक मोड़ था। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि सोच और शासन शैली में बदलाव का…

2000–2005: अस्थिरता से सुशासन की ओर – जब बिहार ने बदलनी शुरू की अपनी तकदीर

बिहार की राजनीति का यह कालखंड, 2000 से 2005, राजनीतिक अस्थिरता, गठबंधन प्रयोगों, और अंततः “सुशासन” के बीज रोपण का दौर था। यह वही समय था जब लालू युग के…

1995 – लालू राज की पुनःस्थापना: जब जनता दल बना बिहार की सत्ता का पर्याय

1995 का बिहार चुनाव राज्य की राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था।यह सिर्फ सत्ता की पुनरावृत्ति नहीं थी , यह लालू युग की पुनर्पुष्टि थी, जब जनता दल…

1990 – लालू युग का आरंभ: जब ‘पिछड़ों की राजनीति’ बनी बिहार की पहचान

1990 का बिहार विधानसभा चुनाव एक चुनाव नहीं, बल्कि सत्ता के सामाजिक ढांचे में क्रांति थी। पहली बार बिहार की राजनीति का केंद्र बदल गया — पटना के सत्ता गलियारों…

1985 – ‘कांग्रेस का आख़िरी स्वर्णकाल’: स्थिरता की वापसी या बदलाव से पहले की शांति?

1985 का बिहार विधानसभा चुनाव राजनीतिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक मोड़ था। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में फैली संवेदनशीलता और सहानुभूति की लहर ने कांग्रेस को एक…

1980 – कांग्रेस की वापसी, लेकिन घट गया जनविश्वास: स्थिरता की उम्मीदों के बीच निराशा का दशक

1977 की जनता लहर के बाद 1980 का बिहार चुनाव एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल और जनभावनाओं के संघर्ष का गवाह बना। जनता पार्टी की अंदरूनी कलह और अस्थिर शासन…

1977 – जनता लहर की आँधी: जब बिहार ने आपातकाल के साए से लोकतंत्र को पुनर्जन्म दिया

भय से स्वतंत्रता की ओर — बिहार में लोकतंत्र का पुनर्जागरण 1977 का बिहार विधानसभा चुनाव सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं था — यह लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का उत्सव था।…