Treatment-of-crooked-teeth

अगर आपके दांत टेढ़े-मेढ़े हैं, तो इसका इलाज अब आप बिना सर्जरी के भी करवा सकते हैं। ये कहना है दिल्ली के ख्यातिप्राप्त ऑर्थोडॉन्टिक डॉ संजय लाल का, जो आज पटना में पटना ऑर्थोडॉन्टिक्स स्टडी ग्रुप द्वारा आयोजित एकदिवसीय कंटीन्यूइंग डेंटल एजुकेशन कार्यक्रम मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर बिहार और झारखंड के युवा ऑर्थोडॉन्टिक डॉक्टर से वे रूबरू हुए और कहा कि जबरे की हड्डी में किसी भी तरह की परेशानी का इलाज अब बिना सर्जरी भी संभव है। ये आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से संभव है और इसमें खर्च भी कम आता है। साथ ही इसमें मरीजों को तकलीफ भी कम होगी।

डॉ लाल ने आगे कहा कि इस कार्यक्रम में युवा डॉक्टरों की भागीदारी उत्साहवर्धक है। वे नई चीजों को जाने और सीखने को उत्साहित नजर आए। उनके मन में उत्सुकताएं भी थी। हमने उन्हें बताया कि आज के दौर में आधुनिक तकनीक से बिना सर्जरी 70 % तक इलाज आसानी से कम खर्च में संभव है। एक अन्य वक्ता डॉ मुकेश कुमार सिंह ने क्लास 3 जबरे के जटिल बीमारी के बारे में विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने इसके उपचार के तरीके और आधुनिक तरीकों के बारे में जानकारी दी, जिससे आने वाले समय में युवा डॉक्टरों को अपने मरीज के इलाज में सहूलियत होगी।

वहीं, इस मौके पर डॉ राजीव लाल ने बताया किइस कार्यक्रम का आयोजन पटना ऑर्थोडॉन्टिक्स स्टडी ग्रुप के तहत हो रहा है। ऑर्थोडॉन्टिक का मतलब है टेढ़े – मेढ़े दांतों को सही करना। यह एक चैप्टर है, जो 2015 में पटना में बनाई गई थी। आज 7 साल हो गए, इसके अंतर्गत पढ़ाई के लिए विभिन्न प्रकार के स्पीकर्स को देशभर से आमंत्रित करते हैं, जो युवा डॉक्टरों को नई तकनीक से अवगत कराते हैं। नए अपडेट पर चर्चा करते हैं। इंडियन ऑर्थोडॉन्टिक्स सोसाइटी के कोषाध्यक्ष हैं। वे अच्छे वक्ता हैं। उन्होंने आज सोसाइटी और इलाज में जो डेवलपमेंट हुआ है, उनके बारे में युवा डॉक्टरों को अवगत कराने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें बिहार – झारखंड के युवा डॉक्टर शामिल हुए हैं।

इस कार्यक्रम के मुख्य संयोजक बुद्धा डेंटल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ (प्रो) उमेश कुमार गोलवारा ने बताया कि हमारा यह आयोजन सफल रहा है। इस तरह के कार्यक्रम से ऑर्थोडॉन्टिक कम्युनिटी के सभी डेन्टिस्ट के बीच जानकारी का आदान – प्रदान होता है। सभी इसका फायदा अपने कार्यों को बेहतर बनाने में लेते हैं। और मरीजों का अच्छा इलाज कर पाने में सक्षम होते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ सुवेन्दु झा और डॉ गुरप्रीत कौर का खास योगदान रहा। इसमें बुद्धा डेंटल कॉलेज के प्रसिद्ध चिकित्सकों के साथ डॉ राजीव लाल, डॉ अनुराग राय, डॉ ज्योतिर्मय, डॉ अमित, डॉ राशि चौहान समेत अन्य लोग भी शामिल रहे।

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