दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस महामारी ने सबको अपनी चपेट में ले लिया है। हमें कोरोना के डिफरेंट वैरिएंट्स और मंकीपॉक्स जैसी बीमारियां का प्रकोप भी देखने को मिला। सब लोग इससे उबर ही रहे थें की अब एक और वायरस ने दस्तक दे दी है। दरअसल, अफ्रीकी देश घाना (Ghana) में मारबर्ग वायरस (Marburg Virus) के मामले सामने आए हैं। इस वायरस से घाना में दो लोग संक्रमित पाए गए, जिनकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, लेकिन अब सवाल ये है की आखिर क्या है ये मारबर्ग वायरस, जो इतना खतरनाक है।
मारबर्ग वायरस रोग (Marburg Virus Disease) इंसानों में अत्यंत घातक बीमारी का कारण बनती है। घाना में इस मारबर्ग वायरस से संक्रमित दो लोगों में पुष्टि हुई है, जो घाना के दक्षिणी अशांति क्षेत्र (Ashanti Region) के अस्पताल में भर्ती थें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार, पहला मामला 26 वर्षीय पुरुष का था, जिसने 26 जून को अस्पताल में जांच कराई और एक दिन बाद उनकी मौत हो गई। दूसरा मामला 51 वर्षीय पुरुष का था जो 28 जून को अस्पताल गए थें और उसी दिन उनकी मौत हो गई थी। घाना के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि 98 लोगों को संक्रमितों के संपर्क में आने के कारण क्वारंटीन किया गया है। इनमें इनमें दोनों मरीजों के संपर्क में आए रिश्तेदार, डॉक्टर्स और मुर्दाघर के कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, उनमें से किसी में अभी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
यह दूसरी बार है जब पश्चिम अफ्रीका में मारबर्ग वायरस की पहचान की गई है। पिछले साल गिनी में एक मामले की पुष्टि हुई थी, लेकिन इस मामले की पुष्टि के पांच हफ्ते बाद ही सितंबर में गिनी की सरकार ने उस प्रकोप के खत्म होने का ऐलान कर दिया था। वहीं, डब्लूएचओ का कहना है कि अफ्रीका के अन्य हिस्सों जैसे अंयुगांडा, केन्या, अंगोला, दक्षिण अफ्रीका और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इस वायरस के छिटपुट मामलों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 2005 में अंगोला में इसका प्रकोप सबसे घातक था जिसमें 200 से अधिक लोग मारे गए थे। मारबर्ग का पहला प्रकोप 1967 में जर्मनी में हुआ था जहां सात लोगों की मौत हुई थी।
मारबर्ग हेमोरेजिक फीवर के रूप में भी जाना जाने वाला मारबर्ग रोग, मारबर्ग नामक वायरस से होता है, जो इबोला (Ebola) के समान ही एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है। यह वायरस भी इबोला परिवार का ही सदस्य है। यह वायरस फलों के चमगादड़ों से लोगों में फैलता है और शरीर के तरल पदार्थ जैसे की पेशाब, लार, पसीना, मल, उल्टी, स्तन का दूध, आदि के जरिए दूसरे मनुष्यों को संक्रमित करता है।
इस वायरस के लक्षणों में सिरदर्द, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, खून की उल्टी और खून का बहना शामिल है। अगर इन पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो मरीज की जान भी जा सकती है। इसके कई लक्षण अन्य संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया या टाइफाइड बुखार या वायरल हेमेरेजिक फीवर के समान होते हैं। फ़िलहाल मारबर्ग वायरस का अभी तक कोई इलाज मौजूद नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि खूब पानी पीने और खास लक्षण दिखाई देने पर उसका इलाज करवाने से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है।
इस मारबर्ग वायरस रोग के लिए न तो अब तक कोई स्पेशल उपचार है और न ही बचाव के लिए वैक्सीन। हालांकि, सही देखभाल के साथ मरीज के बचने की संभावना में सुधार किया जा सकता है। भारत में पहले ही मंकीपॉक्स के मामले देखे गए हैं। अब दूसरे देशों में इस मारबर्ग वायरस के मामलों को देखते हुए ऐसा ही लग रहा है की सरकार को अपनी कमर कस लेनी चाहिए ताकि अब किसी बीमारी को महामारी बनकर भारत में आने से रोका जा सके।
