Durga-Puja

2 साल के लम्बे इंतजार के बाद देश भर में दुर्गा पूजा का आयोजन हुआ। 9 दिनों तक माता की भक्ति में लीन श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। और फिर विजयदश्मी के दिन देश भर में माता को अगले साल फिर से आने का न्योता के साथ नमन आँखों से विदाई दी गयी। देश के अन्य राज्यों के जैसे ही बिहार में भी माता को विदाई दी गयी। राजधानी पटना में विजयादशमी के मौके पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं की पूजन और आरती के बाद बुधवार, 5 अक्टूबर को ज्यादातर जगहों पर माँ दुर्गा की विदाई कर विसर्जन कर दिया गया।

पटना के गायघाट सहित शहर के तमाम गंगा घाटों पर छोटी-बड़ी मूर्तियों के साथ-साथ लोग कलश और पूजन सामग्री गंगा में प्रवाहित करने पहुंचे। वहीं कालीबाड़ी में महिलाओं ने आपस में सिंदूर की होली (सिंदूर खेला) खेलकर मां दुर्गा को विदा किया। लोगों ने मूर्तियों के विसर्जन के बाद गंगा में आस्था की डुबकी भी लगाई।

गंगा घाटों पर मां की प्रतिमा के विसर्जन के मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद रही। इस मौके पर मां की प्रतिमा की विदाई ढोल, ढाक और मां के गीतों के साथ दिया गया। बांग्ला विधि से मां दुर्गा की प्रतिमा करने वाले पूजा पंडालों और कालीबाड़ी में भी बुधवार को प्रतिमा का विसर्जन किया गया। परंपरा के अनुसार प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाने के पहले बंगाली महिलाओं ने मां का शृंगार किया। उन्हें प्रसाद और भोग लगाया। पान के पत्तों से उनकी पूजा की।

इसके बाद मां को सिंदूर चढ़ाकर आपस में सिंदूर की होली (सिंदूर खेला) खेलकर मां को विदा किया। पटना कालीबाड़ी के अशोक चक्रवर्ती कहते हैं कि सिंदूर खेला बंगाली महिलाएं अपने पति के दीर्घ आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

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