Sarswati-Puja

5 फरवरी यानी आज देशभर में बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की धूम देखने को मिली। बिहार में ठण्ड में काफी ज्यादा इज़ाफ़े के बावजूद भी उत्सव पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर स्कूल-कॉलेजों में ज्ञान, कला, विद्या और वाणी की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गयी और छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वस्त्रों में सज-धज कर पूरे विधि-विधान के साथ उनकी आराधना की। इसी के साथ राजधानी पटना के कई स्थानों पर सार्वजनिक पंडालों में भी वीणावादिनी देवी की प्रतिमा स्थापित की गयी है। लोगों ने माँ सरस्वती के दर्शन कर विद्या और सुख-समृद्धि की कामना की।

आपको बता दें कि कई लोग कोरोना को देखते हुए इस अवसर पर सार्वजनिक पंडाल न बना कर अपने घर में ही वीणावादिनी देवी की प्रतिमा स्थापित की है। मालूम हो कि हिंदू धरम में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। माना जाता है कि मां को पीत वर्ण बहुत प्रिय है, इसलिए इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण कर इसी रंग के फूल, फल और मष्ठिान आदि से ही उनको भोग लगाते हैं।

जैसे-जैसे बसंत ऋतु आती है, वैसे-वैसे मौसम से ठंड भी कम होनी शुरू हो जाती है। इस मौसम को पतझर भी कहा जाता है। जिस दौरान पेड़ पौधों से पत्ते झरते हैं और फूल और कलियां खिलने लगती हैं। इसी ऋतू में सरसों की फसल पककर तैयार हो जाती है और प्रकृति हरी चादर ओढ़ कर अपना रंग बरसाती है। बता दें कि देश के अलग अलग राज्यों में बसंत पंचमी अलग तरीके से मनायी जाती है।कई राज्यों में इस अवसर पर देवी सरस्वती की पूजा होती है तो कहीं फसल उत्सव के रूप में इस दिन को मनाया जाता है। इस अवसर पर कई राज्यों में पतंगे भी उड़ायी जाती हैं।

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