एक समय में जहां देश की महिलाएं घर की दहलीज तक नहीं लांघा करती थी। आज वहीं महिलाएं पुरषों के साथ कंधे से कन्धा मिला कर काम कर रही हैं। आज की महिलाएं घर का चूल्हा संभालने के साथ साथ देश की अर्थवयवस्था को भी संभाल रही हैं। और अब आजादी के इतने साल बाद पहली बार भारत की कुल आबादी में पुरषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या बढ़ी है। बुधवार, 24 नवंबर को जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़ों के मुताबिक भारत की कुल आबादी में 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 1020 हो गई है।
साल 2015-16 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 में यह आंकड़ा प्रति 1000 पुरुषों पर 991 महिलाओं का था। और इस बार महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी के साथ साथ जन्म के समय का जेंडर रेश्यो भी सुधरा है। 2015-16 वाले सर्वे के मुताबिक यहीं रेश्यो प्रति 1000 बच्चों पर 919 बच्चियों का था। लेकिन इस साल के सर्वे के अनुसार यह आंकड़ा प्रति 1000 बच्चों पर 929 बच्चियों पर पहुंच गया है।
आपको बता दें कि, इस बार के सर्वे के अनुसार कुल आबादी में जेंडर रेश्यो शहरों से ज्यादा गांवों का बेहतर है। गांवों में प्रति 1000 पुरुषों पर 1037 महिलाएं हैं। लेकिन इसी के साथ आपको यह भी बता दें कि अभी भी महिलाओं की स्थिति बहुत बेहतर नहीं हुई है। आज भी देश में 41% महिलाएं ही ऐसी हैं जिन्हें 10 वर्ष से ज्यादा स्कूली शिक्षा प्राप्त हुई है, यानी वे 10वीं कक्षा से आगे पढ़ सकीं। 59% महिलाएं 10वीं से आगे नहीं पढ़ पाईं। और अगर ग्रामीण इलाकों की बात करें तो वहां सिर्फ 33.7% महिलाएं ही 10वीं के आगे पढ़ सकीं हैं। 5जी के दौर में भी इंटरनेट की पहुंच देश की सिर्फ 33.3% महिलाओं तक ही है।
