ब्रिटिश शासन हमारे देश के लिए एक बुरा काल था जो लम्बे वक़्त तक चला और हमारे समाज को बुरी तरह से बर्बाद करने में कामयाब भी रही। आपको बता दें अंग्रेज़ो ने करीबन 200 वर्षो तक भारत पर राज किया था। जिस बिच भारतीयों को कई तरह के अत्याचार हुए और लोगो के अधिकारो से वंचित करने की भी कई प्रयास हुई। लेकिन आख़िरकार देश के कुछ महान क्रांतिकारियों के बदौलत देश स्वतंत्र हो पाया। आज़ादी की लड़ाई में अपने जी जान लगाने वाले महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान स्वतंत्रता सैनानियो को तो सभी जानते है।
वहीं बिहार से डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे स्वतंत्रता सैनानी भी जाने माने और चर्चित चेहरे है। मगर देश की आज़ादी के लिए कई ऐसे अनजान और अज्ञात वीर जवान भी है जिनके बदौलत यह कार्य पूरा हो पाए। और अब जब हमारे देश को पूर्ण रूप से आज़ाद हुए 75 साल पुरे होने को है तो चलिए आपको कुछ ऐसे क्रांतिकारियों से रूबरू करवाते है जिनके कार्यो ने देश को आज़ाद होने में एक बड़ा प्रभाव डाला था। अगला एक सप्ता स्वतंत्रता सैनानियों को समर्पित!
आज के हमारे पहले क्रान्तिकारी है –
~ अनुग्रह नारायण सिन्हा – “सत्याग्रह आंदोलन”
आधुनिक बिहार के निर्माता, भारतीय राजनेता और बिहार के सर्व प्रथम उप मुख्यमंत्री डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह।
18 जून सं 1887 में औरंगाबाद जिले के पोइयवा नामक गाँव में जन्मे डॉ. अनुग्रह नारायण देश के प्रमुख स्वतंत्रता सैनानीयों में से एक थे। बिहार के चम्पारण जिले से अंग्रेजों के विरुद्ध ‘सत्याग्रह आंदोलन’ करने में महात्मा गाँधी एवं राजेंद्र प्रशाद के साथ इनकी प्रमुख भूमिका रही है। बिहार के आधुनिक निर्माण हेतु इनका नाम सबसे आगे रहा है, जिसके बाद से इनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि उन्हें बिहार विभूति के नाम से दर्ज़ा मिल गया।
डॉ. सिन्हा मानवतावादी प्रगतिशील विचारक एवं दलितों के उत्थान के प्रबल समर्थक के रूप में कार्य किया करते थे। जिसमे उनकी महानता को बढ़ाने में उनकी सौभ्य, शीतल, परोपकारी, अहंकारहीन स्वभाव विशेष प्रभाव डालता था। 1900वी सदी में बिहार के सबसे ज़्यादा पढ़े लिखे व्यक्तियों में से जाने जाते डॉ. अनुग्रह नारायण अपने दौर में वकालत की कार्यकर्ता में भी उत्तीर्णता हासिल किये थे। अगर आपको पता ना हो तो बता दें की “ए.एन कॉलेज (A.N college)” का नाम भी डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा के नाम पर पड़ा है।

