भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के भतीजे रिज़वान कासकर की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। बिल्डर को धमकाने के मामले में 2019 में गिरफ्तार रिज़वान पर मकोका के तहत केस दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से 6 महीने में आरोप तय करने को कहा है। अदालत में जस्टिस एम आर शाह की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि मामले में आरोप तय नहीं किए गए हैं। हमें इस स्तर पर रिजवान को जमानत पर रिहा करने का कोई कारण नहीं दिखता है।
शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा, “हमें इस स्तर पर आवेदक को जमानत देने का कोई कारण नहीं दिखता है। जांच पूरी हो गई है और आरोप पत्र दायर किया गया है। हम अदालत को आज से छह महीने के भीतर आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश देते हैं। फिर उसके लिए अनुरोध करने के लिए खुला होगा इस अदालत के समक्ष जमानत। एसएलपी खारिज कर दी जाती है।”
कासकर को जुलाई 2019 में गिरफ्तार किया गया था। 10 अक्टूबर 2019 को पुलिस ने मकोका के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। मामले के अनुसार, बिल्डर का इलेक्ट्रॉनिक सामान आयात का भी व्यवसाय था। उसने कहा कि उसके बिजनेस पार्टनर पर 15 लाख रुपये का बकाया है। जून 2019 में उसे गैंगस्टर छोटा शकील की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय कॉल आया। फहीम मचमच ने उसे पैसे वापस नहीं मांगने के लिए कहा।
