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बिहार के रत्न रूपी फणीश्वरनाथ रेणु को दुनिया भर में सम्मानित किया जाता है। लेकिन जापान में रेणु को एक अलग तरीके से सम्मानित किया जा रहा है। रेणु के कालजयी उपन्यास ‘मैला आंचल’ को पूरे विश्व पढ़ा जाता है। और अब यहीं उपन्यास जापान में उनके चाहने वालों के लिए अनोखे तरीके लाया जा रहा है।अब रेणु के इस उपन्यास को जापानी भाषा में भी पढ़ा जाएगा। विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर जापान में ओसाका विश्वविद्यालय के मिनोह सेम्बा कैंपस में ‘मैला आंचल’ के जापानी अनुवाद का लोकार्पण किया गया।

जापान के ओसाका में रहने वाले डॉ. वेदप्रकाश सिंह ने इस कार्यक्रम की पूरी जानकारी अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा किया। जहां यह पता चला कि इस कार्यक्रम का संचालन भी उन्होंने ही किया। वेदप्रकाश ने बताया है कि’ मैला आंचल’ के अनुवाद का श्रमसाध्य कार्य मिकि यूइचिरो ने कई वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद पूरा किया। वे उपन्यास में आए लोकभाषा के शब्दों के अर्थ जानने के लिए पूर्णिया में रेणु के गांव भी गए। उन्होंने इस उपन्यास का अनुवाद आज से 25 साल पहले कर लिया था। लेकिन प्रकाशक नहीं मिलने की वजह से यह उपन्यास अभी तक प्रकाशित न हो सका।

मिकि यूइचिरो ने रेणु के बेटे पद्म पराग से वह इसके जापानी अनुवाद की लिखित अनुमति भी ले चुके थे। वेदप्रकाश ने बताया 400 से अधिक पन्ने में प्रकाशित ‘मैला आंचल’ के जापानी अनुवाद को और सुंदर बनाने के लिए हिरोशिमा में रहने वालीं प्रसिद्ध चित्रकार सुश्री हीरोको ताकायामा ने कुछ चित्र भी बनाए हैं। जो
कई बार भारत आ चुकी हैं। भारत से उनको अलग लगाव है और भारतीय पृष्ठभूमि के इन चित्रों से यह किताब और भी सुंदर रूप में पाठकों के हाथ में पहुंचेगी।

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