अदालत में सम्राट चौधरी की बड़ी जीत, विपक्ष की रणनीति नाकाम

दिल्ली से पटना तक सोमवार की सुबह राजनीतिक हलचल से भरी रही। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी को चुनाव में अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। हैदराबाद के एक निवासी द्वारा दायर इस याचिका में आरोप था कि सम्राट चौधरी ने अपने चुनावी हलफनामों में उम्र को लेकर विरोधाभासी जानकारियाँ दी थीं, 1995 में खुद को नाबालिग बताया, 1999 में 25 वर्ष से अधिक उम्र का दावा किया, और 2020 व 2025 में अलग-अलग जन्मतिथि प्रस्तुत की। अदालत ने दो बेंचों में सुनवाई के बाद सख्त टिप्पणी की “न्यायालय का समय बर्बाद न करें।” इस फैसले ने विपक्ष की राजनीतिक रणनीति को कमजोर कर दिया और एनडीए खेमे में राहत की लहर दौड़ा दी।

भाजपा का पलटवार—सत्य और न्याय की जीत

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद भाजपा ने इसे “सत्य और न्याय की जीत” बताया। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने अपने X पोस्ट में लिखा कि यह फैसला झूठ और अफवाह की राजनीति पर करारा प्रहार है। भाजपा का कहना है कि यह याचिका केवल राजनीतिक लाभ के लिए दायर की गई थी, ताकि चुनाव से पहले एनडीए की छवि पर असर डाला जा सके। लेकिन अदालत के इस फैसले ने विपक्ष की मंशा पर विराम लगा दिया और भाजपा कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास का संचार हुआ।

पटना में पोस्टर वॉर,‘25 से 30, फिर से नीतीश’ की दीवारें बोलीं

इसी बीच पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र में जेडीयू समर्थकों ने “25 से 30, फिर से नीतीश” लिखे पोस्टर लगा दिए। इन पोस्टरों के जरिए एनडीए ने यह संदेश देने की कोशिश की कि 25 नवंबर से 30 नवंबर तक चल रहे चुनावी दौर के बाद सत्ता में फिर नीतीश कुमार की वापसी तय है। जेडीयू की सोशल मीडिया टीम ने भी X पर कई पोस्ट किए “बस अब 4 दिनों का इंतजार फिर से आ रही है नीतीश जी की सरकार।” इसके साथ ही एक वीडियो साझा किया गया जिसमें लिखा था “हर मां की दुआओं में हैं नीतीश कुमार।” इन संदेशों ने एनडीए के भीतर आत्मविश्वास और भी बढ़ा दिया, जबकि विपक्षी खेमे में चिंता गहराने लगी।

सम्राट चौधरी का बयान “नीतीश आज भी मुख्यमंत्री हैं और कल भी रहेंगे”

फैसले के बाद सम्राट चौधरी ने मीडिया से कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी है और यहां जनता तय करती है कि कौन कहां बैठेगा। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “55 साल तक कांग्रेस पार्टी ने भारत को लूटा, पिछड़ों को आरक्षण नहीं दिया और दलितों के हक का विरोध किया। लेकिन अब जनता सब देख रही है और सबका हिसाब करेगी।” सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि एनडीए में कोई वैकेंसी नहीं है “नीतीश कुमार आज भी मुख्यमंत्री हैं और कल भी रहेंगे।”

जिला-वार सीटों का गणित, एनडीए ने फिर साधी बढ़त

ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिहार के 38 जिलों में कुल 243 विधानसभा सीटों में से एनडीए ने इस बार 135 सीटें हासिल की हैं। इसमें भाजपा ने 78, जेडीयू ने 52 और हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) ने 5 सीटें जीतीं। दूसरी ओर महागठबंधन को 92 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, जिसमें आरजेडी को 61, कांग्रेस को 19 और वामदलों को 12 सीटें मिलीं। शेष 16 सीटें निर्दलीय और छोटे दलों के खाते में गईं। पटना जिले की 14 सीटों में से एनडीए ने 9, आरजेडी ने 4 और कांग्रेस ने 1 सीट जीती। गया में एनडीए ने 8 में से 5 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि दरभंगा, भागलपुर और नालंदा जैसे जिलों में जेडीयू और भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा। सीमांचल क्षेत्र में हालांकि आरजेडी को कुछ बढ़त मिली, लेकिन राज्यव्यापी तस्वीर में एनडीए आगे दिखा।

फैसले ने बढ़ाया एनडीए का मनोबल

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एनडीए के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक संबल साबित हुआ है। जहां विपक्ष इस मुद्दे को नैतिकता के सवाल के रूप में उठाने की कोशिश कर रहा था, वहीं अदालत की टिप्पणी ने उसे पलटवार का मौका नहीं दिया। अब जब चुनावी नतीजे नजदीक हैं, एनडीए अपने प्रचार में “न्यायालय की सच्चाई और जनमत की जीत” को मुद्दा बना सकता है। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे के लिए यह फैसला न सिर्फ राजनीतिक झटका है बल्कि उनके चुनावी नैरेटिव पर भी गहरा असर डालेगा।

फैसले से चुनावी हवा का रुख बदला

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने बिहार की चुनावी हवा का रुख साफ तौर पर एनडीए की ओर मोड़ दिया है। सम्राट चौधरी पर लगे आरोपों के खारिज होने से भाजपा को नैतिक बढ़त मिली है, जबकि जेडीयू के “फिर से नीतीश” पोस्टर अभियान ने एनडीए के आत्मविश्वास को सार्वजनिक कर दिया है। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या यह निर्णय बिहार की जनता के अंतिम फैसले को भी प्रभावित करेगाया फिर विपक्ष इस झटके से उबर पाएगा? फिलहाल, पटना की सड़कों से लेकर दिल्ली के गलियारों तक, चर्चा बस एक ही है “फिर से नीतीश, फिर से एनडीए।”