मतदान केंद्र के बाहर मिला पर्चियों से भरा लिफाफा

पूर्वी चंपारण के सुगौली विधानसभा क्षेत्र में बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बाद एक ऐसी लापरवाही सामने आई जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी। मतदान समाप्त होने के अगले ही दिन, अमीर खान टोला स्थित मतदान केंद्र संख्या 219 के बाहर ग्रामीणों को एक लिफाफा मिला जो बीवी पैड (VVPAT) से निकलने वाली पर्चियों से भरा हुआ था। जैसे ही यह खबर फैली, गांव में अफवाहों का दौर शुरू हो गया, लोगों को लगा कि मतदान प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई है।

ग्रामीणों की भीड़ और गड़बड़ी की आशंका से मचा हड़कंप

लिफाफा मिलने के बाद देखते ही देखते मतदान केंद्र के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग एक-दूसरे से सवाल करने लगे “क्या हमारे वोट सुरक्षित हैं?”, “कहीं गिनती से पहले ही पर्चियां बाहर तो नहीं आ गईं?”। कुछ लोगों ने इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिससे पूरे इलाके में गड़बड़ी की चर्चाएं तेज हो गईं। स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।

जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने दी सफाई — “यह मॉक पोल की पर्चियां थीं”

जब मामला मीडिया तक पहुंचा, तो जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने प्रेस के सामने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया लिफाफा वास्तविक मतदान प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि वह “मॉक पोल” यानी मतदान शुरू होने से पहले की परीक्षण प्रक्रिया से जुड़ा था। मतदान शुरू करने से पहले हर बूथ पर मशीन की जांच के दौरान कुछ परीक्षण पर्चियां निकलती हैं, जिनका मतदान से कोई संबंध नहीं होता।

प्रशासनिक गलती मानी गई, लिफाफा बरामद कर लिया गया

डीएम जोरवाल ने स्वीकार किया कि यह एक प्रशासनिक चूक थी। उन्होंने बताया कि पीठासीन अधिकारी द्वारा ईवीएम जमा कराते समय यह लिफाफा गलती से बैग से गिर गया, और इसी कारण यह मतदान केंद्र के पास पाया गया। प्रशासन ने तुरंत लिफाफा बरामद कर उसे सुरक्षित रूप से निर्वाची पदाधिकारी के पास जमा करा दिया है। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि इस लापरवाही का मतदान प्रक्रिया या परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

जांच शुरू, संबंधित अधिकारी पर होगी कार्रवाई

डीएम ने यह भी बताया कि घटना की औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। यदि लापरवाही सिद्ध होती है, तो संबंधित पीठासीन अधिकारी या पोलिंग टीम के सदस्य पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता से कोई समझौता नहीं करेगा। सभी चरणों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ग्रामीणों में फैला संशय और असंतोष

हालांकि प्रशासन के बयान के बाद भी स्थानीय ग्रामीणों में असंतोष और संशय का माहौल बना रहा। कई लोगों ने मतदान प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल उठाए। एक ग्रामीण ने कहा — “अगर वोटिंग के बाद पर्चियां बाहर मिल सकती हैं, तो हम अपने वोट पर कैसे भरोसा करें?” वहीं, कुछ लोगों ने प्रशासन की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि स्थिति को संभालने में पुलिस और अधिकारियों ने फौरन कार्रवाई की, जिससे माहौल शांत हुआ।

मॉक पोल की पर्चियों का वास्तविक वोटों से कोई संबंध नहीं

डीएम जोरवाल ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि मॉक पोल की पर्चियां केवल मशीन जांच के लिए होती हैं, और उनका वास्तविक वोटों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन पर भरोसा रखें। सभी वोट सुरक्षित हैं, और ईवीएम सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया गया है।

प्रशासन ने सौंपे सख्त निर्देश, जांच रिपोर्ट मांगी गई

घटना के बाद जिलाधिकारी ने निर्वाचन विभाग को निर्देश दिया है कि हर मतदान केंद्र पर सामग्री की हैंडलिंग के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न उत्पन्न हो। साथ ही, पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट जल्द ही निर्वाचन आयोग को सौंपी जाएगी।

सुगौली का यह मामला यह याद दिलाता है कि चुनावी प्रक्रिया जितनी तकनीकी और पारदर्शी होती जा रही है, उतनी ही जिम्मेदारी भी बढ़ती जा रही है। एक मामूली लापरवाही भी मतदाताओं के विश्वास को डगमगा सकती है। प्रशासन भले ही इस घटना को “मॉक पोल की पर्चियों की चूक” बता रहा हो, पर जनता के मन में उठे सवाल चुनावी सिस्टम के प्रति संवेदनशीलता की ओर इशारा करते हैं। लोकतंत्र की साख के लिए जरूरी है कि हर वोट की सुरक्षा न सिर्फ की जाए, बल्कि दिखे भी।