कल 122 सीटों पर होगा मतदान , 45,399 बूथों पर पहुंचेगी लोकतंत्र की डोर

बिहार में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा। राज्य के 45,399 बूथों पर चुनाव आयोग की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। रविवार शाम तक सभी बूथों पर EVM और चुनाव सामग्री पहुंचाने का काम अंतिम चरण में है। पहले चरण में रिकॉर्ड 65% मतदान ने जहां चुनावी हवा को गरमा दिया, वहीं अब दूसरे चरण की वोटिंग को लेकर प्रशासन और दल दोनों में हलचल तेज है। इस फेज में राज्य के कई अहम जिलों — पटना ग्रामीण, गया, नवादा, कैमूर, औरंगाबाद, मधेपुरा, भागलपुर, सहरसा और नालंदा में मुकाबला निर्णायक माना जा रहा है। इस चरण में कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। 14 नवंबर को जब नतीजे आएंगे, तो यह तय करेगा कि बिहार का झुकाव परिवर्तन की ओर है या निरंतरता की राह पर।


गया के तीन गांवों में 25 साल बाद गूंजेगी लोकतंत्र की पुकार

लोकतंत्र की सबसे भावनात्मक कहानी इस बार गया जिले के इमामगंज प्रखंड से आई है, जहाँ हेरहज, पथरा और केवलडीह गांवों के मतदाता लगभग 25 साल बाद अपने ही गांव में वोट डालेंगे। 2001 के बाद से इन गांवों में नक्सलियों के डर और सुरक्षा कारणों से मतदान केंद्रों को 10–12 किलोमीटर दूर सलैया में स्थानांतरित कर दिया गया था। दूरस्थ इलाके, परिवहन की कमी और भय के माहौल के कारण ग्रामीण वोटिंग से वंचित रह जाते थे। इस बार प्रशासन ने इन तीनों गांवों में फिर से स्थानीय स्तर पर मतदान केंद्र स्थापित किए हैं। गांवों में दीपावली जैसी रौनक है दीवारों पर “पहली बार गांव में वोट देंगे ” लिखी पंक्तियाँ लोकतंत्र की उम्मीद का नया अध्याय लिख रही हैं।


जिलों का समीकरण — पटना से भागलपुर तक सियासी फिज़ा में टकराव

दूसरे चरण में जो 122 सीटें मतदान के लिए जा रही हैं, वे बिहार की चुनावी किस्मत तय करने में सबसे अहम हैं। पटना जिले की 14 सीटें, जिनमें बख्तियारपुर, मसौढ़ी, फुलवारीशरीफ और दानापुर प्रमुख हैं। पिछली बार यहां NDA ने 9, जबकि महागठबंधन ने 5 सीटें जीती थीं। गया की 10 सीटों में 2020 में RJD को 5, JDU को 3 और BJP को 2 सीटें मिली थीं। इस बार यहां जातीय समीकरणों और बेरोजगारी के मुद्दे पर जोर है। भागलपुर और बांका की 11 सीटों में 2020 में NDA 6, महागठबंधन 5 पर रहा था। अब महागठबंधन इस क्षेत्र को “रोजगार का इलाका” बनाकर वोटों की फसल काटने की कोशिश में है। मधेपुरा-सहरसा क्षेत्र की 9 सीटों पर इस बार VIP और RJD दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष ग्रामीण बेल्ट में बढ़त लेता है तो इस फेज के 122 में से 65-70 सीटें महागठबंधन के पक्ष में जा सकती हैं। वहीं NDA ने शहरी मतदाताओं पर फोकस करते हुए सुशासन और स्थिरता को मुद्दा बनाया है।


स्वीप अभियान ने जगाई मतदाता चेतना — रंगोली से निकली लोकतंत्र की खुशबू

चुनाव आयोग के स्वीप (SVEEP) कार्यक्रम के तहत रविवार को गया, पटना और भागलपुर में मतदाता जागरूकता अभियानों ने माहौल बदला। गया में कॉलेज की छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से संदेश दिया “मतदान सिर्फ अधिकार नहीं, कर्तव्य भी है।” भागलपुर के स्कूलों में बच्चों ने “पहले मतदान, फिर जलपान” के नारे लगाए। प्रशासन की यह कोशिश है कि दूसरे फेज में 70% से अधिक मतदान का रिकॉर्ड बने।


पहले चरण का असर — क्या दोबारा लिखी जाएगी बिहार की राजनीतिक पटक था?

पहले चरण में 121 सीटों पर रिकॉर्ड 64.66% मतदान के बाद अब यह माना जा रहा है कि मतदाता इस बार पारंपरिक राजनीति के बजाय विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2020 में RJD ने 75, BJP ने 74, JDU ने 43, और कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं। अब दूसरे चरण में इन 122 सीटों का गणित निर्णायक होगा क्योंकि यदि महागठबंधन यहां 70 से अधिक सीटें जीत लेता है, तो सत्ता परिवर्तन लगभग तय है। वहीं NDA को अपने पुराने गढ़ पटना, नालंदा, औरंगाबाद और कैमूर पर मजबूत पकड़ बनाए रखनी होगी।


बिहार का लोकतंत्र फिर जागा है

बिहार का यह दूसरा चरण सिर्फ वोटिंग का दिन नहीं, बल्कि जनचेतना और अधिकार की पुनर्प्राप्ति का प्रतीक है। गया के वे गांव जो वर्षों से लोकतंत्र से कटे थे, अब नए विश्वास के साथ वोट देंगे। बूथों तक पहुँचती EVM मशीनें सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि उम्मीद का प्रतीक बन चुकी हैं। 11 नवंबर को जब सुबह 7 बजे पहली वोट पड़ेगी, तो यह सिर्फ एक बटन नहीं दबेगा बल्कि बिहार के लोकतांत्रिक इतिहास का नया अध्याय लिखा जाएगा, जहाँ हर उंगली की स्याही एक कहानी कहेगी “हमने वोट दिया, क्योंकि अब बदलाव ज़रूरी है।”