संसद का दिन दूसरा फिर हंगामे की भेंट, SIR पर टकराव चरम पर

संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन भी पहले दिन की ही तरह गहमागहमी, तनाव और तीखी नारेबाजी के साथ शुरू हुआ। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न ऑफ़ इलेक्टोरल रोल्स पर त्वरित चर्चा की मांग को लेकर पूरा सदन घेर लिया। सदन के भीतर दिख रहे पोस्टर, तख्तियां और नारों के बीच माहौल इतना उग्र हो गया कि विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और “वोट चोर, गद्दी छोड़”, “लोकतंत्र से खिलवाड़ बंद करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार SIR के नाम पर चुनावी सूचियों में छेड़छाड़ कर एक बड़ा राजनीतिक खेल खेल रही है, जो आने वाले राज्यों और 2026 के चुनावों को प्रभावित कर सकता है। सत्ता पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, मगर विपक्ष की नजर में SIR चुनावी पारदर्शिता को सीधे तौर पर खतरे में डालता है। सदन में अध्यक्ष ने बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन तेज नारेबाजी, टकराव और हंगामे के बीच सदन को स्थगित करना पड़ा। यह माहौल बताता है कि SIR अब केवल मतदाता सूची का मुद्दा नहीं बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति का एक निर्णायक मोड़ साबित हो रहा है।

दिल्ली की ठंड में गर्माए तेवर, संसद भवन के बाहर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन

संसद भवन के बाहर भी हालात बेहद गर्म दिखे। दिल्ली की ठंड के बीच विपक्षी नेताओं का बड़ा जमावड़ा दिखाई दिया, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य बड़े नेता शामिल हुए। सभी ने हाथों में प्लेकार्ड ले रखे थे, जिन पर बड़े अक्षरों में लिखा था “लोकतंत्र बचाओ”, “चुनावी छेड़छाड़ बंद करो”, “SIR वापस लो”। ये सिर्फ नारे नहीं थे बल्कि विपक्ष की रणनीति का संकेत थे कि वे SIR को किसी भी कीमत पर संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह बड़ा मुद्दा बनाए रखेंगे। विपक्ष ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया को जिस गोपनीयता और तेजी से लागू किया जा रहा है, उससे यह आशंका बढ़ गई है कि लाखों मतदाताओं के नाम बिना सूचना के हटाए जा सकते हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में छेड़छाड़ लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करेगी। कई राज्यों के क्षेत्रीय दल भी इस विरोध में शामिल हुए, जिससे प्रदर्शन और अधिक व्यापक और मजबूत दिखाई दिया। विरोध के इस एकजुट प्रदर्शन ने यह संदेश साफ दिया कि यह सिर्फ किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष की साझा लड़ाई है।

राज्यसभा में तीखी नारेबाजी, कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित

राज्यसभा में SIR को लेकर हंगामा इतना बढ़ गया कि कार्यवाही शुरू होते ही सांसद अपनी सीटों पर नहीं बैठे। विपक्षी सदस्यों ने एकजुट होकर तत्काल चर्चा की मांग की और नारेबाजी शुरू कर दी। सभापति ने कई बार चेतावनी देते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही को बाधित न किया जाए, लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अडिग रहा। माहौल इतना शोरगुल भरा और तनावपूर्ण हो गया कि सभापति को मजबूर होकर कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। पहले दिन भी विपक्ष ने SIR के विरोध में वॉकआउट किया था। आज की स्थिति ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप का खतरनाक प्रयोग बता रहा है। राज्यसभा के भीतर जो दृश्यों ने जन्म लिया, हाथों में दस्तावेज, SIR की प्रतियां और बार-बार लगते नारे, उन्होंने सत्र के बाकी दिनों का संकेत साफ कर दिया कि यह विवाद राजनीतिक तूफान बनने वाला है।

लोकसभा में ‘SIR तूफान’ की वापसी, विपक्ष वेल में उतरा, सदन फिर स्थगित

लोकसभा में भी SIR पर विस्फोटक माहौल दिखाई दिया। जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सीधे वेल की ओर बढ़ने लगे। उन्होंने SIR पर बिना देरी के विस्तृत बहस की मांग करते हुए सरकार पर चर्चा से भागने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष ने शांत रहने की अपील की, लेकिन शोरगुल इतना बढ़ गया कि स्पीकर को एक बार फिर कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष का दावा है कि देशभर के मतदाता SIR के चलते असमंजस में हैं और कई राज्यों में चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। उनका आरोप है कि सरकार जान-बूझकर चर्चा से बच रही है ताकि SIR पर हो रहे सवालों से बचा जा सके। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की रणनीतिक बाधा कहा और आरोप लगाया कि विपक्ष बाकी जरूरी विधेयकों को अटकाने के लिए यह साजिश रच रहा है। यह पूरा टकराव साफ दर्शाता है कि आने वाले दिनों में लोकसभा की कार्यवाही भी इसी तरह प्रभावित होगी।

किरन रिजिजू का पलटवार ‘हर मुद्दे को हथियार मत बनाइए’

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने कभी किसी बहस से परहेज नहीं किया, समस्या यह है कि विपक्ष हर मुद्दे को हथियार बनाकर सदन की कार्यवाही को बाधित करता है। उन्होंने कहा कि सदन के नियम, परंपराएं और शिष्टाचार किसी भी बहस की बुनियाद होते हैं, लेकिन विपक्ष इन सबको ताक पर रख देता है। रिजिजू ने सख्त लहजे में कहा कि सदन को ठप करने से लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता के हित प्रभावित होते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि SIR एक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ का सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना था कि विपक्ष का असली उद्देश्य यह है कि संसद की कार्यवाही न चले ताकि सरकार अपने विकास संबंधी बिल पेश न कर पाए। उनके बयान ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रतिआरोप और तेज हो गए।

प्रियंका गांधी का आरोप ‘सरकार किसी मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं’

प्रियंका गांधी ने सरकार पर और भी तीखा हमला करते हुए कहा कि SIR ही नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई, प्रदूषण, बेरोजगारी, कृषि संकट, और महिलाओं की सुरक्षा जैसे हर गंभीर मुद्दे पर सरकार जवाब देने से बचती रही है। उन्होंने कहा कि संसद चर्चा के लिए होती है, लेकिन सरकार इसे एकतरफा भाषणों का मंच बनाना चाहती है। प्रियंका गांधी ने सांचार साथी ऐप को स्नूपिंग ऐप बताते हुए कहा कि सरकार डिजिटल निगरानी के ज़रिए नागरिकों की निजता पर हमला कर रही है। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे जरूरी है और सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना ही होगा। उनके इस बयान ने विपक्ष के आंदोलन को और भावनात्मक ताकत दी और SIR विवाद को और व्यापक बना दिया।

JDU और BJP का जवाब: विपक्ष को हार का दर्द, SIR पर राजनीति

JDU और BJP नेताओं ने विपक्ष की आलोचना को निराधार और राजनीतिक बताते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया को जरूरत के हिसाब से लागू किया जा रहा है। JDU नेता संजय झा ने राहुल गांधी की बिहार यात्रा पर तंज कसते हुए कहा कि SIR बिहार में एक महीने में पूरा हो गया और लोगों ने विपक्ष के विरोध को गंभीरता से नहीं लिया। भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विपक्ष सिर्फ चुनावी हार का बदला लेने के लिए हर मुद्दे में राजनीति ढूंढ रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का असली उद्देश्य संसद चलने नहीं देना है, ताकि खुद को पीड़ित की भूमिका में दिखाया जा सके। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि विपक्ष जनता को भ्रमित कर रहा है और SIR को एक साजिश की तरह पेश कर रहा है। सत्ता पक्ष के इस जवाब ने विवाद को और सख्त बना दिया।

केरल से लेकर दिल्ली तक SIR विवाद की आग, गंभीर सवालों की अनदेखी का आरोप

केरल के सांसद हिबी ईडन ने कहा कि SIR सिर्फ चुनावी सूची का तकनीकी मामला नहीं, बल्कि मतदाता अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने दावा किया कि कई इलाकों में बिना सार्वजनिक घोषणा के नाम काटे जा रहे हैं, जिससे लाखों नागरिक चुनाव से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी प्रक्रिया अगर चुनाव से पहले चलाई जाती है, तो इसका सीधे तौर पर चुनावी नतीजों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल केरल या दिल्ली का मुद्दा नहीं, पूरे देश में SIR को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता के खिलाफ सबसे बड़ा खतरा बता रहा है और मांग कर रहा है कि इस पर संसद में तुरंत चर्चा हो। विशेषज्ञों का भी कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गलती, बदलाव या छेड़छाड़ का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर पड़ सकता है।

अब जो सवाल सबसे बड़ा बना हुआ है, वह यह है कि क्या सरकार विपक्ष की मांग मानकर SIR पर खुली, व्यापक और बिना शर्त बहस कराएगी? सरकार ने संकेत दिए हैं कि बहस संभव है, लेकिन वह विपक्ष की शर्तों पर नहीं झुकेगी। दूसरी ओर, विपक्ष ने कहा है कि जब तक SIR पर सरकार एक स्पष्ट और ठोस बयान नहीं देती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। संसद के पहले दो दिनों की घटनाओं ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विस्फोटक हो सकती है। यह भी साफ है कि SIR का मुद्दा अब चुनावी राजनीति के केंद्र में आ चुका है और यह विवाद देश की राजनीति को अगले कई महीनों तक प्रभावित कर सकता है। जनता अब यही जानना चाहती है कि क्या सरकार विवाद शांत करके संसद की कार्यवाही पटरी पर लौटाएगी, या SIR एक बड़े राजनीतिक तूफान में बदल जाएगा।