प्रकृति रियलिटी में पृथ्वी को ईश्वर का सबसे अनमोल तोहफा है, लेकिन आज के इस विकास की दौर में कहीं न कहीं प्रकृति को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। वैसे तो प्रकृति ने हमें बहुत सारी चीज़ों से नवाज़ा है और हम इन चीज़ों का अपने हिसाब से यूज भी करते हैं पर किसी भी चीज़ का ज़रूरत से ज़्यादा यूज हानिकारक हीं होता है। प्रकृति को बचाने की ओर एक और कदम बढ़ाते हुए भारत ने देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट (India’s Largest Floating Solar Power Project) का काम पूरा कर लिया है। यह सोलर पॉवर प्लांट (Solar Power Plant) पानी पर तैरेगी जिससे लगभग 100 मेगावाट बिजली पैदा होगी।
देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट अब पूरी तरह से चालू हो गई है। NTPC ने तेलंगाना (Telangana) के रामागुंडम (Ramagundam) में भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट का काम पूरा कर लिया है। इस प्रोजेक्ट से 100 मेगावाट बिजली मिलेगी। इस सोलर प्लांट के चालू होने के साथ दक्षिणी क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर कैपेसिटी का कुल कमर्शियल ऑपरेशन बढ़कर 217 मेगावाट हो गया है। 423 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह प्रोजेक्ट, जलाशय के 500 एकड़ में फैली हुई है।
इससे पहले, NTPC ने केरल के कायमकुलम (Kayamkulam) में 92 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट और आंध्र प्रदेश के सिम्हाद्री (Simhadri) में 25 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट से बिजली का प्रोडक्शन की घोषणा की थी।
इस प्रोजेक्ट को 40 ब्लॉकों में बांटा गया है, और हर एक ब्लॉक 2.5 मेगावाट बिजली बनाता है। प्रत्येक ब्लॉक में एक फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म और 11,200 सोलर मॉड्यूल की एक सरणी होती है। इस फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म में एक इन्वर्टर, ट्रांसफॉर्मर और एक HT ब्रेकर है। यह सोलर मॉड्यूल HDPE यानी की हाई डेंसिटी पोलीईथाईलीन मैटेरियल्स से निर्मित फ्लोटर्स पर रखे जाते हैं। यह प्रोजेक्ट इस मायने में अनूठी है कि इन्वर्टर, ट्रांसफॉर्मर, HT पैनल और SCADA सहित सभी इलेक्ट्रिकल उपकरण भी फ्लोटिंग फेरो सीमेंट प्लेटफॉर्म पर हैं।
यही नहीं, इस तैरते हुए सौर पैनलों के कारण, वॉटर बॉडीज से इवैपोरेशन रेट यानी की भाप बनकर उड़ने का दर कम हो जाती है, जिससे पानी को संरक्षित करने में मदद मिलती है। प्रति वर्ष लगभग 32.5 लाख क्यूबिक मीटर पानी के भाप बनकर उड़ने से बचा जा सकता है।
रामागुंडम में 100 मेगावाट की यह फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल सुविधाओं से संपन्न है। पर्यावरण की दृष्टि से इसका सबसे अच्छा लाभ सबसे कम भूमि की आवश्यकता है। पानी पर होने के कारण इस प्लांट के लिए भूमि की कम आवश्यकता होती है और इस प्रोजेक्ट से लगभग 450 एकड़ की भूमि को बचा लिया गया है, जिससे बची हुई भूमि का उपयोग अन्य उद्देश्यों जैसे खेती या निर्माण कार्य हेतु किया जा सकता है। सोलर मॉड्यूल के नीचे का वाटर बॉडीज उनके परिवेश के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन में सुधार होता है। इसके साथ ही इस प्लांट से जेनेरेट बिजली, इनडायरेक्टली 1,65,000 टन कोयले की खपत कम करेगी, जिससे हर साल 2,10,000 टन कार्बन डाईऑक्साइड का कम एमिशन होगा।
NTPC को उम्मीद है की ऐसे और फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट बनाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना एनर्जी का सप्लाई होता रहेगा। पिछले कुछ सालों में भारत जिस तरीके से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पर्यावरण को बचाने में कर रहा है, उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है की हम आने वाले समय में पर्यावरण को संरक्षित करने में एक तरह से कामयाब हो सकते हैं।
