हाल ही में आये एक परफ्यूम के विज्ञापन ने खलबली मचा दी थी। राजनेताओं से लेकर आभिनेतायें भी इस भ्रामक विज्ञापन का विरोध कर रहे थें। अब सरकार ने भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए, ताकि इस तरह के मैसेजिंग से शोषित या प्रभावित होने वाले उपभोक्ताओं की सुरक्षा की जा सके। उपभोक्ता मामलों के विभाग के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ‘भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश और भ्रामक विज्ञापनों के समर्थन के लिए दिशानिर्देश’ अधिसूचित किए हैं।
ये दिशानिर्देश किसी उत्पाद या सेवा की विशेषताओं को इस तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से रोकते हैं जिससे बच्चों को ऐसे उत्पाद या सेवा की अवास्तविक अपेक्षाएं हों और किसी मान्यता प्राप्त निकाय द्वारा पर्याप्त और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किए बिना किसी भी स्वास्थ्य या पोषण संबंधी दावों या लाभों का दावा करें। इस दिशानिर्देशों में कहा गया है कि बच्चों को लक्षित करने वाले विज्ञापनों में ऐसे उत्पादों के लिए खेल, संगीत या सिनेमा के क्षेत्र से किसी भी व्यक्तित्व को प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए, जिन्हें किसी भी कानून के तहत ऐसे विज्ञापन के लिए स्वास्थ्य चेतावनी की आवश्यकता होती है या बच्चों द्वारा नहीं खरीदा जा सकता है।
डिस्क्लेमर पर भी सरकार ने हिदायत दी है। नियम और शर्तों में यदि कोई घोषणा मुफ्त है तो उसकी डिस्क्लेमर में भी मुफ्त लिखना होगा। यदि मुफ्त हिंदी और नियम और शर्तें लागू अंग्रेजी में घोषित की जाएगी, तो इसे भी भ्रामक विज्ञापन माना जाएगा। डिस्क्लेमर विज्ञापन में किए गए किसी भी दावे के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का प्रयास नहीं करेगा।
सरकार ने निर्माताओं, सेवा प्रदाताओं, विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन एजेंसियों के कर्तव्यों के लिए दिशा-निर्देश भी निर्धारित किए हैं, जो कि विज्ञापन और अन्य से पहले किए जाने वाले उचित परिश्रम हैं। इन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए दंड का भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है। CCPA किसी भी भ्रामक विज्ञापन के लिए निर्माताओं, विज्ञापनदाताओं और एंडोर्सर्स पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। बाद के उल्लंघनों के लिए, CCPA 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है।
