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पिछले साल 26 नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन को लगभग अब 1 साल हो चूका है। इस एक साल में लाखों की संख्या में किसान दिल्ली बॉडर पर अपनी मांगों के साथ डटे रहें। न कड़ाके की ठण्ड ने उन्हें झुकाया और न ही ताप्ती धुप में उनका मनोबल टूटता। अगर कुछ टूटा तो वो है सरकार की ज़िद। जी हां, मोदी सरकार से आज, 19 नवंबर को ऐलान किया है कि वे तीनों कृषि कानूनों को वापस ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशवासियों को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया है कि उनकी सरकार तीनों कृषि कानून को वापस लेगी और आगामी संसद सत्र (Parliament Session) में इस बारे में जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

देशवासियों को संबोधित करते हुए मोदी ने ये भी कहा कि वे इसके लिए कमेटी का गठन करेंगे। सरकार की लाख जतन के बाद भी किसानों ने अपना आंदोलन नहीं रोका है। उन्होंने ने ये भी कहा कि ये सरकार की ही कमी होगी जो किसानों के इस आंदोलन को नहीं रोक पाए। प्रधानमंत्री ने सभी प्रदर्शनकारी किसानों से गुज़ारिश करते हुए गुरुपर्व के मौके पर आप अपने घर और खेत पर लौट जाने की अपील की है।

तीनों कृषि कानून सरकार द्वारा वापस लेने के बाद दिल्ली बॉडर पर बैठे किसानों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है। इस खबर को सुनने के बाद किसानों ने एक दूसरे को बधाई देते हुए मिठाईयां बाटी है।

क्या है तीनों कृषि कानून ?

पहला कानून
आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून, 2020 – इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान किया गया था। ऐसा माना जा रहा था कि इस कानून के प्रावधानों से किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा। जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

दूसरा कानून
कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून, 2020 – इस कानून के मुताबिक किसान APMC मतलब कृषि उत्पाद विपणन समिति के बाहर भी अपने उत्पाद बेच सकते थे। जिसके तहत ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा कि जहां किसानों और व्यापारियों को मंडी के बाहर अपनी फसल बेचने का आजादी होगी। कानून में राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच कारोबार को बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम करने की बात भी इस कानून में है।

तीसरा कानून
कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून, 2020 – इस कानून का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी फसल की एक निश्चित कीमत दिलवाना था। जिसके मुताबिक कोई किसान फसल उगाने से पहले ही किसी व्यापारी से समझौता कर सकता था। इस समझौते में फसल की कीमत, फसल की गुणवत्ता, मात्रा और खाद आदि का इस्तेमाल आदि बातें शामिल होनी थीं।

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