दिल्ली के लाल किला इलाके को 10 नवंबर की शाम दहला देने वाला आत्मघाती हमला एक बड़े आतंकी खाके का हिस्सा था। यह हमला सिर्फ एक ‘सुसाइड ब्लास्ट’ नहीं, बल्कि ‘मार्टरडम ऑपरेशन’ जैसा बताया जा रहा है। नया VIDEO सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि पुलवामा निवासी आतंकी डॉ. उमर नबी ने खुद को शहीद बताने की कहानी रची थी और पूरी तैयारी के साथ दिल्ली पहुंचा था। वीडियो में वह टूटी-फूटी अंग्रेजी में कहता है— “यह सुसाइड नहीं, शहीद होने का मिशन है।” इससे जांच एजेंसियों को संकेत मिला कि यह हमला अचानक नहीं, बल्कि महीनों की प्लानिंग का नतीजा था।

हमले का दिन: मस्जिद में ठहराव से लेकर सुभाष नगर सिग्नल तक

NIA द्वारा जारी नए CCTV फुटेज ने उस दिन के हर कदम की कहानी सामने ला दी है। दोपहर 2:35 बजे उमर नबी अपनी हुंडई i20 को अरुणा आसिफ अली रोड पर दौड़ाता दिखा। वह इसी रोड पर स्थित एक मस्जिद में 10 मिनट रुका। शाम होते-होते वह लाल किला पार्किंग पहुंचा और फिर ठीक 6:52 बजे, भीड़भाड़ वाले सुभाष नगर सिग्नल पर कार में जोरदार धमाका हुआ। 15 लोगों की मौके पर मौत हो गई, 20 से अधिक घायल हुए। सड़क पर चीख-पुकार, बिखरी गाड़ियां, और आग की लपटें इस हमले की तीव्रता बयान कर रही थीं।

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मामला उतना ही भयावह होता गया। NIA ने खुलासा किया कि डॉ. उमर जिस वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का हिस्सा था, वह हमास की तर्ज पर ड्रोन और रॉकेट हमलों की प्लानिंग कर रहा था। 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हुए हमले की तकनीक इस मॉड्यूल की प्रेरणा थी। उनका लक्ष्य था भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन से बम बरसाना और बड़े पैमाने पर जनहानि करना। यह देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे खतरनाक अलर्ट थ

तकनीकी मास्टरमाइंड: जसीर बिलाल वानी की भूमिका

डॉ. उमर का अहम साथी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश, अनंतनाग के काजीगुंड का रहने वाला है। NIA ने उसे श्रीनगर से पकड़ा। उस पर आरोप है कि वह छोटे हथियारबंद ड्रोन बना सकता था और उन्हें मॉडिफाई कर सकता था। उसी ने डॉ. उमर को तकनीकी सपोर्ट दिया। वह भीड़भाड़ वाले बाजारों पर ड्रोन से बम गिराने की योजना पर काम कर रहा था, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग निशाने पर आ सकें। वानी को सोमवार को कोर्ट में पेश कर 10 दिन की NIA कस्टडी मिल गई है।

जांच में सामने आया कि ब्लास्ट में इस्तेमाल i20 कार जम्मू-कश्मीर के पंपोर निवासी आमिर राशिद अली के नाम पर रजिस्टर्ड थी। वह डॉ. उमर के संपर्क में आखिरी व्यक्ति था। NIA ने उसे 16 नवंबर को दिल्ली से गिरफ्तार किया। आमिर दावा करता था कि वह कार खरीदने आया था, लेकिन जांच में उसके कॉल रिकॉर्ड, मूवमेंट और उमर से मीटिंग ने उसे संदिग्ध बना दिया।

8 गिरफ्तार, 5 डॉक्टर, मॉड्यूल की चौंकाने वाली प्रोफ़ाइल

अब तक इस मामले में 8 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और हैरानी की बात यह है कि इनमें से 5 डॉक्टर हैं। यह एक ऐसा मॉड्यूल है जिसने आतंकवाद को इंटेलिजेंट टेररिज्म का रूप दिया तकनीक, शिक्षा और नेटवर्क के दम पर हाई-प्रोफाइल हमले की योजना बनाई जा रही थी। NIA बाकी सदस्यों और सपोर्ट सिस्टम की पहचान में जुटी है। लाल किले के ठीक पास स्थित यह ट्रैफिक सिग्नल हर दिन हजारों वाहनों से भरा रहता है। यही भीड़ हमलावर का लक्ष्य थी। कार का एक्सप्लोजन ऐसा था कि आसपास खड़ी कई कारों के शीशे चकनाचूर हो गए और आग तेजी से फैल गई। दिल्ली पुलिस और NDRF की टीमें मिनटों में मौके पर पहुंच गईं, लेकिन तब तक त्रासदी हो चुकी थी।

जसीर बिलाल, आमिर रशीद, जलील वानी सभी को कस्टडी में भेज दिया गया है। NIA का कहना है कि अगला चरण ड्रोन मॉड्यूल को सपोर्ट करने वाले फंडिंग नेटवर्क और टेक्निकल टीम की पहचान है। एजेंसी जल्द और गिरफ्तारियों की तैयारी में है।