महनार में पत्थरबाज़ी का बवाल — RJD उम्मीदवार पर गंभीर आरोप
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के दौरान वैशाली जिले की महनार विधानसभा सीट पर हिंसा का माहौल बन गया। यहाँ राजद उम्मीदवार ई. रविन्द्र सिंह पर भीड़ को उकसाकर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) पर पत्थरबाजी करवाने का आरोप लगा है। यह घटना 6 नवंबर की दोपहर जंदाहा प्रखंड के बूथ संख्या 53 और 54 पर हुई।
सेक्टर पदाधिकारी एएसआई जनार्दन राय ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें ई. रविन्द्र सिंह सहित 6 नामजद और 20 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। महनार SDPO प्रवीण कुमार ने पुष्टि की है कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह सीट राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जाती है — जहाँ पिछली बार RJD को बढ़त मिली थी, लेकिन अब मामला कानून-व्यवस्था के सवाल पर जा पहुँचा है।
पहले चरण की वोटिंग में वैशाली सबसे हॉट ज़ोन — सियासी तापमान चरम पर
वैशाली जिले में इस चरण में कुल 8 विधानसभा सीटों (राजापाकर, महुआ, महनार, राघोपुर, हाजीपुर, लालगंज, पातेपुर और जंदाहा) पर वोट डाले गए। इनमें महनार और राघोपुर विशेष रूप से हाई-प्रोफाइल सीटें रहीं — राघोपुर से तेजस्वी यादव, और महनार से ई. रविन्द्र सिंह मैदान में हैं।
2020 के चुनाव में वैशाली जिले में RJD को 5 सीटें, JD(U) को 2 सीटें और BJP को 1 सीट मिली थी। इस बार बढ़ते मतदान प्रतिशत और सुरक्षा बलों पर हुए हमलों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
खरगे का हमला: “नीतीश अवसरवादी, मोदी रोकते हैं उड़ानें भी”
गया जिले में आयोजित जनसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा वार किया। खरगे ने कहा — “मैं नौहट्टा के लिए समय पर आ गया था, लेकिन मोदी ने गयाजी एयरपोर्ट पर ही रोक दिया। उनकी फ्लाइट उड़ने तक हम उड़ नहीं सकते थे।”
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “नीतीश कुमार अवसरवादी नेता हैं, जिन्हें जहाँ कुर्सी दिखती है, वहीं चले जाते हैं। दिसंबर 2023 में उन्होंने खुद कहा था कि भाजपा समाज में भय और घृणा फैला रही है, तो फिर आज कैसे उसी के साथ हैं?”
इस बयान ने कांग्रेस और RJD के समर्थकों के बीच ऊर्जा भर दी है, वहीं NDA की ओर से अमित शाह ने इसे “हताशा भरा वक्तव्य” बताया।
अखिलेश और प्रियंका की सभाओं से बढ़ा विपक्ष का मनोबल
चुनाव प्रचार के आखिरी दिन अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, प्रियंका गांधी और मुकेश सहनी ने साझा जनसभाएं कीं। महागठबंधन ने युवाओं और महिलाओं के मुद्दों को केंद्र में रखकर “नौकरी हर परिवार में, सुरक्षा हर गांव में” जैसे नारे दिए।
वैशाली, पटना ग्रामीण, और गया जिलों में आयोजित सभाओं में बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार महिलाओं का वोट प्रतिशत 2.4% बढ़ा है, जो विपक्ष के पक्ष में जा सकता है।
राजद में बगावत — सीताराम यादव और बेटों पर कार्रवाई
चुनाव के बीच राजद में अंदरूनी कलह भी खुलकर सामने आई। मधुबनी जिले के खजौली विधानसभा सीट से जुड़े विवाद में पार्टी ने पूर्व विधायक सीताराम यादव और उनके दोनों बेटों — राकेश रंजन उर्फ विमल यादव और राजेश कुमार यादव — को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया।
दरअसल, इस सीट से RJD ने ब्रजकिशोर यादव को टिकट दिया था, जिससे नाराज होकर सीताराम यादव के बेटे ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन कर दिया। अब तीनों के निष्कासन के बाद खजौली सीट पर सीधा मुकाबला RJD बनाम निर्दलीय हो गया है।
2020 में मधुबनी जिले की 9 विधानसभा सीटों में से RJD ने 4, BJP ने 3, और JDU ने 2 पर जीत दर्ज की थी। इस बार आंतरिक मतभेदों से RJD की स्थिति कमजोर पड़ सकती है।
सियासी नतीजों का समीकरण — सीटों की लड़ाई और जिलों का गणित
पहले चरण में 121 सीटों पर मतदान हुआ है, जिनमें से वैशाली (8 सीटें), पटना (14 सीटें), गया (10 सीटें), मधुबनी (9 सीटें), दरभंगा (8 सीटें) और मुजफ्फरपुर (11 सीटें) प्रमुख जिले रहे।
2020 में इन जिलों में NDA को कुल 66 सीटें और महागठबंधन को 55 सीटें मिली थीं। अब तक के रुझानों और 64.66% के रिकॉर्ड वोटिंग टर्नआउट को देखते हुए, चुनावी समीकरण में बड़ा बदलाव संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बढ़ा हुआ मतदान ग्रामीण और युवा वोटरों की सक्रियता का परिणाम है, तो महागठबंधन को बढ़त मिल सकती है। लेकिन अगर यह भाजपा समर्थक शहरी वोटरों की लामबंदी है, तो NDA की वापसी भी संभव है।
बिहार 2025 का यह चुनाव केवल सत्ता की अदला-बदली नहीं, बल्कि जनता की विश्वास और बदलाव की परीक्षा है। वैशाली की पत्थरबाज़ी से लेकर गया की सभाओं तक — हर घटना इस बात का संकेत दे रही है कि जनता अब भावनाओं से नहीं, मुद्दों से वोट दे रही है।
243 सीटों की इस लड़ाई में 121 का पहला चरण यह तय करेगा कि बिहार “परिवर्तन की ओर बढ़ेगा या स्थिरता की राह चुनेगा।”
