चुनाव नतीजे से पहले ही मोकामा में दावत का संग्राम

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही मोकामा में सियासत अपने चरम पर है। इस बार मुकाबला केवल वोटों का नहीं, बल्कि शान और शक्ति प्रदर्शन का भी है। मोकामा के दो बाहुबली उम्मीदवार, अनंत सिंह और सूरजभान सिंह, दोनों ने अपने-अपने समर्थकों के लिए महाभोज का ऐलान किया है। अनंत सिंह के पटना स्थित आवास पर पिछले दो दिनों से तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। बड़े-बड़े टेंट लगाए गए हैं, और माहौल किसी शादी समारोह से कम नहीं। उधर, सूरजभान सिंह ने भी अपने पटना के घर पर जश्न की शुरुआत कर दी है। मोकामा का असली राजा कौन बनेगा, इसका फैसला तो काउंटिंग के बाद होगा, पर फिलहाल दोनों खेमों में उत्साह चरम पर है।

अनंत सिंह के घर दो लाख रसगुल्ले और 48 हलवाइयों की फौज

अनंत सिंह के पटना स्थित माल रोड वाले आवास पर इस समय किसी उत्सव जैसा माहौल है। यहां 12 चूल्हे लगातार जल रहे हैं और 48 हलवाई दिन-रात खाना बनाने में जुटे हुए हैं। बताया जा रहा है कि दो लाख रसगुल्ले और काले जामुन तैयार किए जा रहे हैं। भोज के मेनू में पूरी-सब्जी, पुलाव, रायता और चटनी शामिल है। खास बात यह है कि अनंत सिंह का बेटा, जो इस वक्त लंदन में है, वीडियो कॉल के जरिए हर तैयारी पर नजर रख रहा है। जैसे पिता जेल से निर्देश दे रहे हों और बेटा विदेश से आयोजन की निगरानी कर रहा हो।

23,000 स्क्वायर फीट में टेंट, 50,000 मेहमानों का इंतज़ाम

इस भव्य आयोजन के लिए 23,000 स्क्वायर फीट के क्षेत्र में विशाल पंडाल लगाया गया है। भोज में 50,000 लोगों को खिलाने-पिलाने की तैयारी की जा रही है। मिठाइयों के लिए दो टैंकर सूधा दूध मंगवाया गया है, जिसकी कीमत लगभग छह लाख रुपए बताई जा रही है। आज शाम से मुख्य पकवान बनना शुरू होगा। हलवाई पूरी और सब्जी तैयार करेंगे, जो सुबह तक स्टोर कर ली जाएगी। भोज सुबह दस बजे से शुरू होगा और मेहमानों को गर्म पूरियों के साथ मिठाइयां परोसी जाएंगी। माना जा रहा है कि पटना शहर और मोकामा से हजारों लोग इस भोज में शामिल होंगे।

जेल में बैठे ‘छोटे सरकार’, पर नजर हर डिटेल पर

अनंत सिंह इस समय पटना की बेऊर जेल में बंद हैं, लेकिन जेल की चारदीवारी उनकी राजनीतिक सक्रियता को रोक नहीं सकी है। सीमित मुलाकात के बावजूद उनके समर्थक हर जानकारी जेल तक पहुंचा रहे हैं — आवास की व्यवस्था, सुरक्षा, खाने-पीने का इंतजाम और हर छोटी-बड़ी तैयारी की खबर उन्हें दी जा रही है। अनंत सिंह ने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों को सोशल मीडिया के जरिए भी न्योता भेजा है। उनके आधिकारिक पेज से पोस्ट किया गया, “मोकामा विधानसभा के समस्त एनडीए कार्यकर्ताओं, समर्थकों, शुभचिंतकों के लिए आमंत्रण। आप सभी सादर आमंत्रित हैं। 25 से 30 फिर से नीतीश।” यह संदेश स्पष्ट करता है कि वे चुनाव नतीजों से पहले ही आत्मविश्वास से भरे हुए हैं।

चार बार के विधायक, पांचवीं बार सत्ता की चाह

मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। 2005 से लेकर अब तक वे चार बार विधायक रह चुके हैं — दो बार जेडीयू, एक बार आरजेडी और एक बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में। हालांकि, AK-47 राइफल रखने के मामले में अयोग्य घोषित होने के बाद उन्हें राजनीति से कुछ समय के लिए दूरी बनानी पड़ी। 2022 में उन्होंने अपनी पत्नी नीलम देवी को चुनाव मैदान में उतारा, जो आरजेडी की टिकट पर जीतकर विधायक बनीं। अब AK-47 मामले में बरी होने के बाद अनंत सिंह फिर से खुद मैदान में हैं और मोकामा की जनता से एक बार फिर समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।

64.77% वोटिंग और दो बाहुबली घरानों की जंग

इस बार मोकामा विधानसभा में 64.77 प्रतिशत मतदान हुआ है। यहां से जेडीयू के प्रत्याशी अनंत सिंह का मुकाबला पूर्व सांसद और बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी से है। यह सीट हमेशा से बिहार की राजनीति का केंद्र रही है, जहां बाहुबल, प्रभाव और जनसमर्थन की परीक्षा होती है। जनता के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प बना हुआ है, एक ओर जेल में बंद अनंत सिंह और दूसरी ओर राजनीतिक रूप से मजबूत सूरजभान परिवार। मोकामा की पहचान ही अब इन दोनों घरानों से जुड़ गई है।

हत्या, गिरफ्तारी और राजनीतिक पुनरुत्थान की कहानी

30 अक्टूबर को मोकामा में हुई झड़प में आरजेडी नेता दुलारचंद यादव की मौत के बाद सियासी माहौल गरमा गया था। इस मामले में अनंत सिंह को 1 नवंबर की आधी रात गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा था कि वे घटना स्थल पर मौजूद थे, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया कि दुलारचंद की मौत हार्ट फेल और सीने पर भारी दबाव के कारण हुई। इस विवाद ने अनंत सिंह की छवि को और चर्चित बना दिया। जेल से गिरफ्तारी के बावजूद उनके समर्थक अब भी उन्हें ‘छोटे सरकार’ कहकर संबोधित करते हैं और उन्हें पीड़ित नेता के रूप में देखते हैं।

जेल में रोटी-सब्जी, बाहर भोज की रौनक

बेऊर जेल में अनंत सिंह के लिए साधारण भोजन रोटी और सब्जी तैयार होती है। वहीं बाहर उनके नाम पर भव्य भोज की तैयारी जारी है। जेल सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद उन्होंने सामान्य भोजन किया और मुस्कराकर पूछा, “हमर चुनऊआ कइसन रहतई?” यह वाक्य अब मोकामा के लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग कहते हैं कि अनंत सिंह चाहे जेल में हों या बाहर, उनका प्रभाव आज भी वैसा ही है।

मोकामा की राजनीति हमेशा से तीखी रही है, लेकिन इस बार माहौल में मिठास घुल गई है। रसगुल्लों और भोज की तैयारियों के बीच सियासत का स्वरूप भी बदलता दिख रहा है। यह चुनाव केवल दो प्रत्याशियों का नहीं, बल्कि मोकामा की पहचान, उसके गौरव और उसकी जनता की भावनाओं का भी है। जेल के भीतर बंद नेता के नाम पर बाहर उत्सव मनाया जा रहा है, यह दृश्य बिहार की राजनीति के अनोखे स्वरूप को दिखाता है। अब सबकी नजर कल के नतीजों पर है कि क्या रसगुल्लों की मिठास जीत का स्वाद बनेगी या हार की कड़वाहट में घुल जाए।