संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने दिल्ली और उत्तर भारत में लगातार बिगड़ते वायु गुणवत्ता स्तर को लेकर अपना आक्रोश पूरी ताकत के साथ सामने रखा। पिछले एक महीने से AQI गंभीर स्तर से नीचे नहीं उतर रहा और शहर की आबादी लगातार गंदगी भरी हवा को अपने फेफड़ों में लेने को मजबूर है। इसी पीड़ा को दिखाने के लिए विपक्षी सांसद मास्क, ऑक्सीजन मास्क और कई रंगों की सुरक्षा ढालों के साथ संसद परिसर में पहुंचे। कई सांसदों ने कहा कि यह प्रदर्शन केवल राजनीति नहीं, बल्कि दिल्ली के हर उस परिवार की आवाज है जो अपने बच्चों को घर में बंद रखने और बुजुर्गों को दवाइयों पर निर्भर रखने के लिए मजबूर है। प्रदर्शनकारी सांसदों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हवा की इस राष्ट्रीय त्रासदी से निपटने में सच्ची राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही, जबकि अस्पतालों में सांस से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की चिंताजनक भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।
‘मौसम का मजा लीजिए’ टिप्पणी पर विपक्ष का तीखा वार
पीएम मोदी की टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने जोरदार और तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक विशाल बैनर उठाया जिस पर लिखा था “मौसम का मज़ा लीजिए”। यह व्यंग्यात्मक बैनर उन लाखों लोगों की बेबसी को दर्शाता है जो हर दिन सांस लेते समय अपनी छाती में जलन महसूस करते हैं, जिनके बच्चे स्कूल जाने के बाद खांसी और आंखों में जलन लेकर लौटते हैं, और जिनके घरों में एयर प्यूरिफायर भी हवा को साफ करने में असफल साबित हो रहे हैं। सांसदों ने कहा कि ऐसे माहौल में जब दिल्ली रात में धुंध और दिन में जहरीले धुएं की परतों में घिरी हो, “मौसम का मज़ा लेना” सिर्फ एक कटाक्ष बनकर रह जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अब राजनीतिक बयानबाज़ी छोड़कर वास्तविक कदम उठाने होंगे, क्योंकि यह संकट अब सिर्फ दिल्ली या NCR का नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत का हो चुका है।
रूस के प्रथम उपप्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव के संसद पहुंचने के साथ ही राजनीति, कूटनीति और प्रदूषण बहस का एक दुर्लभ और समानांतर संगम देखने को मिला। पुतिन की भारत यात्रा से पहले मांतुरोव की उपस्थिति एक बड़ी कूटनीतिक घटना मानी जा रही थी, जो भारत-रूस साझेदारी की मजबूती का संकेत है। लेकिन प्रदूषण पर उठ रही आवाज़ों ने यह स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली की धुंध ने न सिर्फ लोगों की सेहत बल्कि देश की राजनीतिक प्राथमिकताओं को भी चुनौती दी है। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि जब राजधानी की सांसें तक कैद होने लगी हों, तब अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के स्वागत से पहले दिल्ली की हवा को साफ करना जरूरी है। यह दृश्य इस चुनौती की गंभीरता को दर्शाता है कि राष्ट्रीय राजधानी में कूटनीतिक महत्व और पर्यावरणीय संकट किस तरह एक-दूसरे से टकरा रहे हैं।
प्रियंका गांधी का भावुक बयान, हवा में जहर से बच्चों और बुजुर्गों की हालत पर चिंता
प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बेहद संवेदनशील और भावनात्मक बयान देते हुए कहा कि हर गुजरते साल दिल्ली की हवा पहले से बदतर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यह राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि जनस्वास्थ्य का मुद्दा है जिसे राष्ट्रीय महत्व के फैसलों की तरह गंभीरता से लिया जाना चाहिए। प्रियंका गांधी ने बताया कि उनकी मां सोनिया गांधी को अस्थमा की समस्या है और दिल्ली की हवा उन्हें हर दिन एक नई चुनौती पेश करती है। उन्होंने कहा कि हजारों बच्चे धुंधभरी हवा की वजह से बाहर खेलने से डरते हैं और स्कूलों के बाहर मास्क पहने बच्चों की कतारें अब एक सामान्य दृश्य बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ एक शहर की लड़ाई नहीं बल्कि देश के भविष्य की लड़ाई है, क्योंकि प्रदूषण धीरे-धीरे हर व्यक्ति की जिंदगी में घुसकर उसे प्रभावित कर रहा है।
कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव देकर सरकार को यह कहते हुए कटघरे में खड़ा किया कि प्रदूषण पर राष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस रणनीति लागू नहीं की गई। सांसदों ने कहा कि सरकार का रवैया सिर्फ कागज़ी कार्यवाही तक सीमित है। advisories जारी कर दिए जाते हैं, स्कूलों को बंद करने की चेतावनी दे दी जाती है, लेकिन वास्तविक समाधान जैसे उद्योगों पर निगरानी, वाहनों पर नियंत्रण, थर्मल प्लांट उत्सर्जन पर कार्रवाई या पराली प्रबंधन पर समन्वित नीति कहीं दिखाई नहीं देती। माणिकम टैगोर ने कहा कि बच्चों की फेफड़ों की क्षमता घट रही है लेकिन सरकार की योजनाओं की गति इस संकट के मुकाबले बेहद धीमी है। उनके मुताबिक इस स्थिति को देखते हुए प्रदूषण को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने का समय आ चुका है।
दिल्ली सरकार और केंद्र दोनों जिम्मेदार, नहीं मिलेगा समाधान
कांग्रेस नेता अजय माकन ने प्रदूषण मुद्दे पर भाजपा और AAP दोनों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि दिल्ली के वर्तमान हालात दोनों सरकारों की नीतिगत विफलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह वर्षों में कांग्रेस शासन में दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए व्यापक कदम उठाए गए थे, लेकिन आज बसों की संख्या जरूरत से कम है, इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रसार धीमा है और मेट्रो विस्तार भी प्रदूषण नियंत्रण की जरूरतों के अनुरूप नहीं बढ़ रहा। उन्होंने कहा कि जब तक दिल्ली की जनता सस्ती और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर निर्भर नहीं होगी, तब तक वाहनों का प्रदूषण कम होने की उम्मीद करना बेकार है।
प्रदूषण के मुद्दे के साथ-साथ विपक्ष ने आर्थिक संकट पर भी सरकार को घेरा। प्रियंका गांधी ने गिरते रुपये को लेकर भाजपा पर तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब मनमोहन सिंह के कार्यकाल में डॉलर की कीमत बढ़ने पर भाजपा नेता सवाल उठाते थे, तो अब रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर 90.43 तक गिरने पर सरकार का जवाब क्या है। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ता प्रदूषण एक ही कहानी का हिस्सा हैं एक ऐसी कहानी जिसमें आम नागरिक लगातार दबाव झेल रहा है जबकि सरकार बड़े सवालों से बच रही है।
