चुनावी काफिले में खूनी हमला

गुरुवार दोपहर मोकामा में 76 वर्षीय RJD नेता दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दुलारचंद जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के चुनाव प्रचार काफिले में शामिल थे। तभी दूसरी पार्टी के समर्थकों ने अचानक उनके काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में दुलारचंद की मौके पर ही मौत हो गई और पीयूष प्रियदर्शी की गाड़ी के शीशे भी टूट गए।

परिवार का गुस्सा और पोस्टमॉर्टम की लंबी देरी

हत्या के बाद परिवार का गुस्सा चरम पर था। रातभर शव घर पर पड़ा रहा और परिवार पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति देने में हिचकिचा रहा। आखिरकार लगभग 18 घंटे बाद, सुबह करीब 11 बजे ही पोस्टमॉर्टम के लिए सहमति मिली। इस दौरान सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा सिंह भी ट्रैक्टर में बैठकर पोस्टमॉर्टम स्थल पर गईं। लोग अनंत सिंह के खिलाफ “फांसी दो” के नारे भी लगा रहे थे, जिससे पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना रहा।

घटना स्थल और FIR का विवरण

हत्या बसावन चक के पास हुई। दुलारचंद के पोते के बयान के आधार पर भदौर थाने में अनंत सिंह, उनके दो भतीजे रणवीर और कर्मवीर, छोटन सिंह और कंजय सिंह समेत दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

घटनास्थल से वायरल हुआ वीडियो

मोकामा के घोसवरी क्षेत्र से घटना का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दो पार्टियों के समर्थक आपस में गोलीबारी कर रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि इस दौरान पीयूष प्रियदर्शी की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। वीडियो में फायरिंग की आवाज और लोगों के दौड़ते हुए दृश्य ने पूरे इलाके में भय और तनाव पैदा कर दिया।

अनंत सिंह और सूरजभान परिवार की प्रतिक्रिया

हत्या के आरोप पर अनंत सिंह ने कहा कि यह सब सूरजभान का किया हुआ है। वहीं, सूरजभान और उनकी पत्नी वीणा देवी ने कहा कि उनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। वीणा देवी मोकामा से RJD की प्रत्याशी भी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बयान ने इलाके में चर्चा और राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।

दुलारचंद के विवादित बयान और चुनावी टकराव

हत्या से दो दिन पहले ही दुलारचंद ने अनंत सिंह की पत्नी को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अनंत सिंह की पत्नी नाचने के लिए चुनावी मैदान में आई थीं। इसके अलावा, दुलारचंद ने कई सार्वजनिक स्थानों पर अनंत सिंह को चुनौती दी थी और कहा कि अगर अनंत छोटे सरकार हैं तो प्रियदर्शी बड़े सरकार हैं। यह लगातार टकराव और खुली चुनौती हत्या की पूर्वसूचना जैसा प्रतीत हो रहा था।

टाल इलाके में दबदबा और आपराधिक इतिहास

80 के दशक में मोकामा के टाल इलाके में दुलारचंद यादव का काफी दबदबा था। उनके खिलाफ रंगदारी, मारपीट, फायरिंग और किडनैपिंग के दर्जनों मामले दर्ज थे। 1990 में जमानत मिलने के बाद दुलारचंद ने राजनीति में कदम रखा और लोकदल से चुनाव लड़ा। उनके गैंग ने इलाके में किडनैपिंग और बंधक बनाने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया।

ग्रामीणों का गुस्सा और वोट बहिष्कार की चेतावनी

दुलारचंद की हत्या के बाद ग्रामीण और परिजन बेहद गुस्से में हैं। उनका कहना है कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार करेंगे। दुलारचंद के चचेरे पोते रविरंजन कुमार ने कहा कि पहले उनके ऊपर हमले हुए, अब दादा की हत्या हुई। उनका कहना था कि अगर न्याय नहीं मिला तो हमलोगों का गुस्सा चुनाव में स्पष्ट रूप से दिखेगा।

राजनीतिक और सामाजिक संदेश

इस हत्याकांड ने बिहार की चुनावी राजनीति और अपराध के घनिष्ठ संबंध को उजागर कर दिया है। टाल इलाके में दशकों से दबदबा रखने वाले नेताओं की हत्या यह स्पष्ट करती है कि राजनीतिक और आपराधिक ताकतें अभी भी चुनावी मैदान को प्रभावित कर रही हैं। मोकामा की सड़कों पर हुई यह घटना न केवल राजनीतिक खतरों की याद दिलाती है, बल्कि कानून और व्यवस्था की गंभीरता पर भी सवाल उठाती है।