बेगूसराय के आसमान में गूंजेगी प्रियंका की आवाज
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शनिवार को बेगूसराय के बछवाड़ा में अपनी पहली जनसभा को संबोधित करेंगी। मंच तैयार है, मैदान खचाखच भर चुका है और भीड़ का उत्साह अपने चरम पर है। यह रैली न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि पूरे महागठबंधन के चुनावी अभियान का नया अध्याय मानी जा रही है।
चार लेयर की सुरक्षा, भीड़ में जोश का माहौल
प्रियंका गांधी की सभा के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कार्यक्रम स्थल पर चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है। एसपी, डीएसपी से लेकर महिला पुलिसकर्मी तक तैनात हैं। मंच के आसपास NSG और स्थानीय पुलिस के जवानों ने घेरेबंदी कर रखी है। भीड़ में युवा, महिलाएं और किसान बड़ी संख्या में मौजूद हैं — सभी प्रियंका की पहली बिहार रैली के साक्षी बनने को उत्सुक हैं।
NDA पर प्रियंका का सीधा हमला — “अब नौकरी देने की बात क्यों?”
पटना में मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी ने NDA के घोषणा पत्र पर करारा वार किया। उन्होंने कहा, “अब वे लोग नौकरी देने का वादा क्यों कर रहे हैं? इतने सालों से वे सत्ता में थे तब क्या कर रहे थे?” उनका यह बयान युवाओं और बेरोजगारी के मुद्दे को सीधे चुनावी बहस के केंद्र में ला रहा है।
बछवाड़ा में त्रिकोणीय मुकाबला, पर समीकरण जटिल
बछवाड़ा विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। महागठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी शिव प्रकाश गरीबदास, सीपीआई से अवधेश कुमार राय, और एनडीए समर्थित भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र मेहता आमने-सामने हैं। 2020 के चुनाव में यही तीनों चेहरे आमने-सामने थे और नतीजा बेहद रोमांचक रहा। भाजपा के सुरेंद्र मेहता ने मात्र 484 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उन्हें 54,738 वोट मिले थे, जबकि अवधेश कुमार राय को 54,254 और शिव प्रकाश गरीबदास को 39,878 वोट हासिल हुए थे।
इस बार मैदान में और भी खिलाड़ी
इस बार मुकाबले में नए चेहरे भी उतर चुके हैं। जन सुराज से *रमोद कुमार, आम आदमी पार्टी से अविनाश कुमार, बहुजन समाज पार्टी से दिलीप कुमार, और निर्दलीय उम्मीदवारों में शत्रुघन कुमार, विपिन कुमार और राजाराम सिंह अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में बछवाड़ा का चुनाव अब केवल तीन दलों की टक्कर नहीं, बल्कि बहुकोणीय हो चुका है जहां हर वोट निर्णायक साबित हो सकता है।
बेगूसराय की सातों सीटों पर गर्मी, बछवाड़ा में सबसे ज्यादा नजरें
बेगूसराय जिले की सात विधानसभा सीटों में बछवाड़ा फिलहाल सुर्खियों में है। यहां न सिर्फ प्रियंका गांधी की पहली सभा हो रही है, बल्कि यह सीट महागठबंधन और NDA दोनों के लिए “प्रेस्टीज बैटल ” बन चुकी है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि प्रियंका की मौजूदगी से न केवल शिव प्रकाश गरीबदास की स्थिति मजबूत होगी, बल्कि आसपास के इलाकों में भी कांग्रेस समर्थक वोटों में उत्साह लौटेगा।
महिलाओं और युवाओं पर प्रियंका की नजर
प्रियंका गांधी की रैलियों का एक खास पहलू रहा है उनका फोकस महिलाओं और युवाओं पर। बछवाड़ा की सभा में भी इसी वर्ग की बड़ी भागीदारी देखी जा रही है। प्रियंका से उम्मीद की जा रही है कि वे महंगाई, बेरोजगारी और महिला सुरक्षा जैसे विषयों पर तीखे सवाल उठाएंगी।
कांग्रेस के लिए चुनौती और उम्मीद दोनों
बिहार की सियासत में कांग्रेस लंबे समय से हाशिए पर रही है। ऐसे में प्रियंका गांधी की यह रैली पार्टी के लिए एक “पॉलिटिकल रिवाइवल मूव ” के रूप में देखी जा रही है। जानकारों का मानना है कि प्रियंका की रैलियां कांग्रेस को नए जनसंपर्क की दिशा दे सकती हैं खासकर तब जब राज्य की राजनीति पर फिलहाल दो ही बड़े ध्रुव , NDA और महागठबंधन हावी हैं।
क्या बेगूसराय से लौटेगी कांग्रेस की रफ्तार?
जब प्रियंका गांधी मंच पर आएंगी, तो यह सिर्फ एक भाषण नहीं होगा बल्कि कांग्रेस की उस राजनीतिक यात्रा की शुरुआत होगी जो बिहार में खोई हुई जमीन को वापस पाने की कोशिश कर रही है। बछवाड़ा की इस रैली से एक सवाल पूरे बिहार में गूंजेगा “क्या प्रियंका गांधी बिहार की सियासत में कांग्रेस की नई सांस बनेंगी?” भीड़ के जोश और नारों के बीच यह जवाब शायद आज जनता खुद देने वाली है।
