बुलेट पर निकले पप्पू, पीछे बैठे उम्मीदवार
पूर्णिया के कसबा विधानसभा क्षेत्र में रविवार देर शाम नज़ारा फिल्मी था— सामने बुलेट पर बैठे पप्पू यादव और पीछे कांग्रेस प्रत्याशी मो. इरफान आलम। सैकड़ों बाइकों का काफिला, नारों की गूंज और फूलों की बरसात के बीच रोड शो जनसैलाब में बदल गया।
सड़क किनारे खड़े लोगों ने हाथ हिलाकर स्वागत किया, वहीं समर्थक ‘पप्पू यादव जिंदाबाद ’ और ‘कांग्रेस एकजुट हो ’ के नारे लगाते नजर आए।
‘सीमांचल को अब आवाज देनी होगी’
श्रीनगर में सभा को संबोधित करते हुए पप्पू यादव ने कहा— “सीमांचल और कसबा की गरीबी, पिछड़ापन और बेरोजगारी खत्म करने का वक्त आ गया है। कांग्रेस को जिताकर राहुल गांधी के हाथों को मजबूत करें, नहीं तो बीजेपी बिहार को लूटती रहेगी।”
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने SIR और अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई बिना थके लड़ी, और हजारों किलोमीटर का सफर तय किया ताकि गरीबों की आवाज दिल्ली तक पहुंचे।
AIMIM और सरकारों पर बरसे पप्पू
सभा के दौरान पप्पू यादव ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और केंद्र व राज्य सरकार दोनों पर जमकर निशाना साधा। बोले— “जो धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगते हैं, वे बिहार की तरक्की रोक रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि बिहार को नारे नहीं, नीयत चाहिए। और वो नीयत महागठबंधन के पास है, जो हर तबके के लिए काम करना चाहता है।
कसबा में चार तरफ से टक्कर
कसबा विधानसभा इस बार हॉट सीट बनी हुई है। एक तरफ NDA से LJP(R) के नितेश कुमार सिंह हैं, तो दूसरी ओर महागठबंधन के मो. इरफान आलम।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के बागी आफाक आलम निर्दलीय मैदान में हैं, जो वोटों में सेंध लगा सकते हैं। वहीं पूर्व विधायक प्रदीप दास भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मुकाबले में हैं।
‘जनता तय करेगी— बुलेट की रफ्तार या लालटेन की रोशनी’
कसबा में सियासी मुकाबला अब बुलेट की रफ्तार पकड़ चुका है।
पप्पू यादव के रोड शो ने माहौल गरमा दिया है, लेकिन असली फैसला 14 नवंबर को जनता के वोट से होगा— क्या सीमांचल की सड़कों पर कांग्रेस की गूंज सुनाई देगी, या सत्ता की सवारी किसी और के हाथ जाएगी।
