दिल्ली के नामचीन सेंट कोलंबा स्कूल से जुड़े 16 वर्षीय छात्र की आत्महत्या ने पूरी राजधानी को हिला दिया है। इस दर्दनाक घटना के बाद अब उसके पिता प्रदीप पाटिल ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अदालत में दाखिल याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस जांच को ठीक से नहीं कर रही और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। पिता की माँग है कि केस को स्थानीय पुलिस से लेकर CBI को सौंपा जाए ताकि उनके बेटे की मौत के पीछे की सच्चाई पूरी निष्पक्षता से सामने आ सके। अदालत ने मामले की गंभीरता देखते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 12 मार्च तय की गई है जिससे परिवार में अब उम्मीद का एक नया दीप जला है।
18 नवंबर की काली शाम, एक नाबालिग की आखिरी छलांग और नोट जिसने खोला सच
18 नवंबर को 16 वर्षीय छात्र ने दिल्ली मेट्रो स्टेशन से कूदकर अपनी जान दे दी। यह घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं थी बल्कि एक ऐसा सामाजिक ज़ख्म छोड़ गई जिसने कई सवाल खड़े कर दिए। उसके पास से मिला एक हस्तलिखित नोट अत्यंत मार्मिक और आरोपों से भरा हुआ था। उसमें छात्र ने अपने स्कूल की हेडमिस्ट्रेस और तीन शिक्षकों पर लगातार मानसिक और भावनात्मक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया था। नोट में लिखे शब्दों से झलकता दर्द इस बात का संकेत था कि वह लंबे समय से भय और तनाव में जी रहा था। इन आरोपों के सामने आने के बाद चारों स्टाफ सदस्यों को स्कूल प्रबंधन ने तुरंत निलंबित कर दिया।
परिवार का आरोप, चार घंटे इंतजार, FIR की भाषा बदलने का दबाव और ढीली जांच
छात्र के पिता ने अदालत को बताया कि पुलिस का रवैया घटना के पहले दिन से ही संदिग्ध था। उनका कहना है कि FIR दर्ज कराने के लिए उन्हें थाने में चार घंटे से ज्यादा इंतजार कराया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस के कुछ अधिकारियों ने FIR में स्कूल का नाम न लिखने का दबाव बनाया और बयान को अपने अनुसार बदलने की कोशिश की। परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि जब आरोपित सभी महिलाएँ हैं तो एक पुरुष जांच अधिकारी को क्यों लगाया गया। पिता का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई अब तक बेहद धीमी है और किसी आरोपी पर कठोर कदम नहीं उठाया गया है। परिजनों का कहना है कि जांच एजेंसी प्रभाव और दबाव में काम कर रही है जिसके चलते वे CBI या किसी विशेष SIT द्वारा जांच की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस का बचाव, कहा जांच जारी, CCTV मिला, CBI पर पहले से ही दबाव
दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि FIR 19 नवंबर को यानी घटना के अगले ही दिन दर्ज की गई थी। पुलिस के वकील संजय लौ ने कहा कि जांच में कोई लापरवाही नहीं हो रही और अब तक कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा चुके हैं। पुलिस का दावा है कि स्कूल से CCTV फुटेज कब्जे में लिया गया है और उसकी पड़ताल में छात्र द्वारा लगाए गए कुछ आरोपों की पुष्टि भी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पिता वर्तमान जांच से संतुष्ट नहीं हैं तो केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया जा सकता है। लेकिन CBI पहले से ही अत्यधिक मामलों में व्यस्त है इसलिए उसे यह केस सौंपना उचित नहीं होगा। यह बयान पिता और उनके वकील को संतुष्ट नहीं कर सका।
अदालत में उठे बड़े सवाल, क्या स्थानीय पुलिस पर है किसी का प्रभाव?
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि स्थानीय पुलिस अब तक आरोपियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर पाई है जबकि छात्र ने अपने अंतिम नोट में स्पष्ट रूप से उनका नाम लिखा था। पिता ने अदालत से यह गुहार लगाई है कि उनके बच्चे की आखिरी इच्छा थी कि उसके साथ अन्याय करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और उसे न्याय मिले। उनका कहना है कि पुलिस की तरफ से लापरवाही, सुस्ती और दबाव में काम करने के संकेत साफ दिखते हैं जिसके चलते जांच को कहीं और ट्रांसफर करना ही उचित होगा। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से सुनते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
एक परिवार की पीड़ा, न्याय की उम्मीद में दिन रात की लड़ाई
बेटे की मौत ने पाटिल परिवार की दुनिया बदल दी है। उनकी हर साँस अब न्याय की एक उम्मीद लिए चल रही है। पिता का कहना है कि वह अपने बेटे के आखिरी शब्दों का सम्मान करना चाहते हैं जिसने अपनी मृत्यु से पहले स्पष्ट लिखा था कि जिन शिक्षकों ने उसे प्रताड़ित किया उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अदालत में दाखिल याचिका में उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मेरे बेटे का मामला नहीं बल्कि हर उस बच्चे का मामला है जो डर, अवसाद या प्रताड़ना की वजह से आवाज नहीं उठा पाता। इसलिए वे चाहते हैं कि इस मामले की जांच ऐसी एजेंसी करे जिस पर पूरा देश भरोसा कर सके।
