देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की उड़ानों में हो रही अभूतपूर्व अव्यवस्था पांचवें दिन भी थमने का नाम नहीं ले रही है। शनिवार को 400 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द होते ही एयरपोर्ट से लेकर सोशल मीडिया तक हड़कंप मच गया है। लगातार पांच दिनों से जारी इस संकट ने पिछले चार दिनों में 2000 से अधिक उड़ानों को निगल लिया है और करीब तीन लाख यात्री फंस चुके हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े हवाई अड्डों पर यात्रियों की बेचैनी रातभर हॉल और कॉरिडोर में फैलती रही जहां कई यात्री फर्श पर ही चादर डालकर सो गए तो कई भूखे प्यासे बस अपने बोर्डिंग पास को देखते रहे। इंडिगो ने कहा है कि सिस्टम 15 दिसंबर तक सामान्य हो सकता है लेकिन यात्रियों की नाराजगी इस स्थिति से बहुत आगे बढ़ चुकी है।

सरकार की सख्त टिप्पणी और जांच की तैयारी

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इंडिगो के लिए अस्थायी राहत देने के बाद शनिवार को सख्त शब्दों में कहा कि नए नियम सभी एयरलाइंस पर लागू हुए हैं लेकिन समस्या केवल इंडिगो को हुई है जो स्पष्ट रूप से आंतरिक अव्यवस्था की ओर इशारा करती है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि एयरलाइन की लापरवाही की जांच होगी और आवश्यकता हुई तो ऐक्शन भी तय है। मंत्रालय ने 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है और हवाई अड्डों को निर्देश दिया गया है कि रद्द उड़ानों का ऑटो रिफंड तुरंत जारी किया जाए और विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों को तत्काल सहायता मिले ताकि संकट में लोगों की पीड़ा कम की जा सके।

कई शहरों में यात्रियों की स्थिति बेहद दयनीय दिख रही है। कोलकाता एयरपोर्ट पर घंटों लाइन में फंसी कई महिलाएं रोती दिखीं जिनके हाथ में बच्चे और बैग दोनों थे पर उम्मीद कहीं नहीं। अहमदाबाद में एक महिला यात्री इंडिगो काउंटर पर जोर-जोर से रो पड़ी क्योंकि उसकी फ्लाइट तीन बार रीशेड्यूल होने के बाद आखिरकार रद्द कर दी गई और अब उसके पास आगे की यात्रा का कोई तरीका नहीं बचा। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर 106 से ज्यादा उड़ानों का अचानक रद्द होना इतना बड़ा संकट बना कि हजारों सूटकेस बिना दावेदार के एक जगह ढेर होते चले गए और लोग सीढ़ियों पर बैठकर घंटों इंतजार करते रहे। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें स्टाफ कोई जानकारी तक नहीं दे रहा था और वे केवल इंटरनेट और अफवाहों के भरोसे अपनी यात्रा का अनुमान लगा रहे थे।

नए नियम और इंडिगो की क्रू शॉर्टेज

इस समय इंडिगो जिस समस्या से जूझ रही है उसका मूल कारण DGCA के नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों के दूसरे चरण का लागू होना है जिसने पायलटों और केबिन क्रू के लिए आराम और ड्यूटी की सीमा और सख्त कर दी है। DGCA ने इन नियमों को यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए लागू किया जिसमें रात की ड्यूटी, लगातार लैंडिंग, दैनिक उड़ान घंटों और साप्ताहिक विश्राम को नए तरीके से परिभाषित किया गया। इसका सबसे बड़ा प्रभाव इंडिगो पर पड़ा जिसके पास 434 विमान और देश की 60 प्रतिशत घरेलू उड़ानें हैं और जहां पायलटों और क्रू को यह बदलाव अचानक भारी पड़ गया। स्टाफ की कमी इतनी गंभीर हुई कि रोजाना सैकड़ों उड़ानें खतरे में पड़ गईं और एयरलाइन ने खुद स्वीकार किया कि सिस्टम को रिबूट होने में समय लग रहा है।

देशभर में फ्लाइट कैंसिलेशन की चेन रिएक्शन

जम्मू से श्रीनगर, देहरादून से भुवनेश्वर, हैदराबाद से पुणे और मुंबई से बेंगलुरु तक लगभग हर बड़े शहर में उड़ानें धड़ाधड़ रद्द हो रही हैं। मुंबई में सुबह नौ बजे तक 109 फ्लाइट्स रद्द थीं और यात्रियों की इतनी भीड़ जमा हो गई कि एयरपोर्ट पर सुरक्षा बलों को अतिरिक्त बैरिकेड लगाने पड़े। पुणे में 42 उड़ानें कैंसिल होने के बाद यात्रियों के सामान ट्रॉली में फेंककर छोड़ दिए गए और लोग घंटों बैगेज क्लेम में भटकते रहे। हैदराबाद में 69 उड़ानें रद्द होने से कई बिजनेस मीटिंग, इवेंट और मेडिकल अपॉइंटमेंट तक प्रभावित हो गए। कई एयरपोर्ट लगभग वीरान पड़ गए क्योंकि जो लोग फ्लाइट पकड़ने आए थे वे अपने ही टिकट काउंटर्स पर फंसे रह गए।

अन्य एयरलाइंस के बढ़े दाम और यात्रियों की मजबूरी

इंडिगो के संकट का असर अन्य एयरलाइंस पर भी दिख रहा है। कई यात्रियों ने शिकायत की कि अन्य एयरलाइंस ने किराए अचानक दोगुना कर दिए और जहां सामान्य टिकट चार हजार में मिलता था वहां अब लोगों को बीस हजार तक देना पड़ रहा है। गोवा एयरपोर्ट पर एक यात्री ने बताया कि दिल्ली से देर से पहुंचने पर उसकी कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई और एयरलाइन ने न कोई विकल्प दिया न कोई सहायता। अहमदाबाद में एक यात्री पिछले तीस घंटे से अपना सामान ढूंढ रहा है लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिली। स्पाइसजेट ने स्थिति को देखते हुए अगले दो से तीन दिनों में सौ अतिरिक्त उड़ानें चलाने का ऐलान किया है ताकि दबाव को कुछ कम किया जा सके लेकिन यात्रियों की तादाद इतनी ज्यादा है कि यह राहत भी फिलहाल अपर्याप्त लग रही है।

इंडिगो संकट इतना गहरा हो गया कि भारतीय रेलवे को भी मैदान में उतरना पड़ा और उसने 37 प्रीमियम ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच जोड़ने का फैसला किया जिससे रोजाना करीब पैंतीस हजार अतिरिक्त लोगों को यात्रा की सुविधा मिल सके। यह कदम उन रूट्स पर खासतौर पर लिया गया है जहां इंडिगो उड़ानें सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं जैसे दिल्ली–मुंबई, बेंगलुरु–हैदराबाद, पुणे–दिल्ली और कोलकाता–गुवाहाटी। कई यात्रियों ने कहा कि हवाई यात्रा छोड़कर ट्रेन से जाना अब मजबूरी बन गई है क्योंकि फ्लाइट की अनिश्चितता के चलते कोई भरोसा नहीं कि वे समय पर मंजिल तक पहुंच पाएंगे।

मानवीय कहानियां संकट के बीच उभर रहीं

इस संकट के बीच कई ऐसी भावनात्मक कहानियां सामने आईं जिन्होंने लोगों के दिलों को छू लिया। कर्नाटक के हुबली में मेघा क्षीरसागर और संगम दास अपनी ही शादी के रिसेप्शन में नहीं पहुंच सके और उन्हें भुवनेश्वर से वीडियो कॉल के जरिए मेहमानों से जुड़ना पड़ा जबकि उनके माता-पिता स्टेज पर अतिथियों का स्वागत कर रहे थे। दिल्ली एयरपोर्ट पर एक पिता अपने छोटे बच्चे के लिए सेनेटरी नैपकिन मांगते हुए स्टाफ से बहस करता नजर आया क्योंकि घंटों फंसे रहने के बाद उनके पास बुनियादी जरूरतों की भी सुविधा नहीं थी। रायपुर में यात्री सुरक्षा कर्मियों से भिड़ गए क्योंकि फ्लाइट रद्द होने के बाद न एयरलाइन ने मदद की न किसी ने यात्रियों की दुश्वारियों पर ध्यान दिया।

इंडिगो संकट अब अदालत तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें इस संकट को यात्रियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया गया है और तुरंत कानूनी हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि इंडिगो ने फ्लाइट कैंसिलेशन की जानकारी समय पर नहीं दी, यात्रियों को न भोजन दिया न होटल और न ही सुरक्षित वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था। कोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है और आवश्यक हुआ तो एयरलाइन को कड़े दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं।

इंडिगो का स्टेटमेंट और उम्मीद की किरण

इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने कहा कि एयरलाइन यात्रियों की परेशानी के लिए क्षमा चाहती है और पूरी कोशिश कर रही है कि 10 से 15 दिसंबर के बीच संचालन सामान्य हो जाए। एयरलाइन ने यह भी कहा कि पूरे ऑपरेशनल सिस्टम को रिबूट किया जा रहा है और अतिरिक्त पायलटों और क्रू को तैयार किया जा रहा है। DGCA ने इंडिगो को 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी राहत भी दी है ताकि रोस्टरिंग आसान हो सके और उड़ानें धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकें। हालांकि यात्रियों की नाराजगी एक बार फिर यह याद दिलाती है कि भारत जैसी व्यस्त हवाई रूट वाली देश में कोई भी एयरलाइन इतनी बड़ी प्रणालीगत गड़बड़ी का जोखिम नहीं उठा सकती।