विकिलीक्स (WikiLeaks) के संस्थापक जूलियन (Julian Assange) असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किया जाएगा। ब्रिटेन की अदालत ने असांजे को इराक और अफगानिस्तान युद्ध से जुड़ी सीक्रेट फाइल्स छापने का दोषी पाया है। कोर्ट ने कहा है कि असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किया जाए, जहां उन्हें 175 साल जेल की सजा काटनी होगी। अदालत के फैसले के खिलाफ अपील के लिए बचाव पक्ष के पास 18 मई तक का समय है। कोर्ट का ये आदेश ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल के पास जाएगा। प्रीति पटेल अगर असांजे के प्रत्यर्पण को मंजूरी देती हैं तो असांजे के वकील इस फैसले को चुनौती देने के लिए ब्रिटेन की हाई कोर्ट का रूख कर सकते हैं।
असांजे ने 2010-11 में हजारों क्लासिफाइड डॉक्युमेंट्स को पब्लिक कर दिया था। वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के एक न्यायाधीश ने संक्षिप्त सुनवाई में यह आदेश जारी किया। असांजे ने विकीलीक्स की वेबसाइट पर मिलिट्री और डिप्लोमेटिक डॉक्युमेंट सार्वजनिक किए थे। इसके जरिए उन्होंने अमेरिका, इंग्लैंड और नाटो की सेनाओं पर इराक में युद्ध अपराध का आरोप लगाया था। असांजे पर यह भी आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान रूसी खुफिया एजेंसियों ने हिलेरी क्लिंटन के कैम्पेन से जुड़े ईमेल हैक कर विकीलीक्स को दिए थे।
असांजे ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं। वह 2019 से लंदन की बेल्मार्श जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की तरफ से उन्हें प्रत्यर्पित करने के लिए कोर्ट में दाखिल की गई अर्जी को सार्वजनिक किया गया। अप्रैल 2019 में अमेरिका ने उन पर हैकिंग की साजिश रचने का आरोप लगाया था। 23 मई 2019 को अमेरिका की ग्रैंड ज्यूरी ने असांजे के खिलाफ जासूसी के 17 केस दर्ज किए। अगर असांजे पर लगे सभी आरोपों में उन्हें दोषी पाया जाता है, तो 175 साल तक की सजा हो सकती है। इसी के चलते असांजे अमेरिका प्रत्यर्पण के लिए राजी नहीं थे।
