hanging bridge

बिहार में टूरिस्ट प्लेसों के नाम पर लोगों का माइंड सेट हो चूका है कि लोग या तो राजगीर जायेंगे या तो गया। लेकिन सही मायने में पूरा बिहार ही टूरिस्ट प्लेसों से भरा पड़ा है और ऊपर से बिहार सरकार भी आने वाले समय में बिहार को एक टूरिस्ट हब बनाने की कोशिश में लगी हुई है। और इसी क्रम में अब बिहार के उस जिले को टूरिस्ट हब बनाने के फ़िराक में सर्कार है जहां पर देश का 44% सोने की खान पाई गयी है। जी हाँ मैं बिहार के जमुई जिले की ही बात कर रही हूँ। यहां आने वाले समय में बिहार सरकार जमुई जिले को टूरिस्ट हब के रूप में विकसित करने का काम करने वाली है। तो चलिए आपको बताते हैं कि बिहार के स्वर्ण नगरी में सरकार टूरिस्टों के लिए क्या क्या सुविधा उपलब्ध करवा रही है। 


बिहार में टूरिज्म के विकास के लिए राज्य सरकार अलग अलग जिलों के कई जगहों को चिन्हित कर उसे विकसित करने की ओर अपनी कदम बढ़ा रही है। सरकार द्वारा बढ़ाया हुआ ये कदम अब बिहार की स्वर्ण नगरी तक पहुँच गया है। जमुई जिले में अभी फ़िलहाल आधा दर्जन जगहों को चिन्हित किया गया है। जिसे टूरिज्म के हब के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है। जमुई की इन चिन्हित जगहों में से एक जगह ऐसी भी है जहाँ पर आने वाले समय में टूरिस्टस की भीड़ जुटेगी। क्योंकि उस जगह पर बिहार का पहला हैंगिंग ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। 


सब कुछ ठीक रहा तो इसी साल जमुई इको टूरिज्म का हब बन जाएगा। वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जिले के अलग-अलग प्रखंडों के 6 जगहों को चयनित कर राज्य सरकार को प्रस्ताव वेज दिया गया है। इन जगहों को इको फ्रेंडली और टूरिज्म के लिए विकसित करने की योजना बनाई गई है। साथ ही कई और तरह की सुविधाओं का भी विकास इस योजना के तहत सोचा गया है। अब विभाग को बस राज्य सरकार की स्वीकृति मिलने का इंतजार है।   ये सभी योजनाएं बिहार में पर्यटकों को आकर्षित करने के दृष्टिकोण से किया जा रहा है। 


सबसे जरुरी बात ये है कि देश में बढ़ते प्रदूषण डॉ को देखते हुए इन सभी जगहों पर पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार के निर्माण कार्य किए जाएंगे। जिससे इको सिस्टम अपना काम अच्छी तरह से करती रहे। तो चलिए आपको बता दें कि जमुई के वे 6 जगह कौन कौन से हैं जहां पर इको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जायेगा। 


वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से इको टूरिज्म के तहत विकसित करने के लिए झाझा प्रखंड स्थित नकटी पक्षी आश्रयणी, खैरा प्रखंड के कुंडग्राम जन्मस्थान और पंचभूर झरना, बरहट प्रखंड के पत्नेश्वर मंदिर के समीप स्थित कटौना पहाड़ी, चकाई प्रखंड स्थित नरोदह झरना और झाझा प्रखंड के सिमुलतला स्थित हल्दिया झरना को चिन्हित किया गया है। जिसमें से कुंडग्राम जन्मस्थान के पास एक लंबा हैंगिंग ब्रिज बनाया जायेगा। आसान भाषा में जिसे हम हवा में लटकता हुआ पुल कहते हैं। ये ब्रिज अपने आप में आकर्षण का केंद्र होगा। इसके अलावा नकटी पक्षी आश्रयणी के पास 4 स्टे होम, वाच टावर और बांस का सीटिंग स्पाट बनाया जाएगा। साथ ही पंचभूर झरना के पास, कटौना पहाड़ी के पास और नारोदह झरना के पास ट्रैकिंग रूट के साथ- साथ पर्यटन विभाग के निर्देशानुसार कई प्रकार के सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इन सभी स्थलों पर स्थानीय लोगों के सशक्तिकरण और बाहर से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर इको डेवलपमेंट कमेटी का भी गठन किया जाएगा।


आपको बता दें कि टूरिस्टों को अपनी और आकर्षित करने वाला बिहार का पहला हँगिंग ब्रिज पुरे 1.5 किलोमीटर लम्बा होने वाला है। 1.5 किलोमीटर लम्बा ये ब्रिज लोगों को निश्चित रूप से अपनी और आकर्षित करेगा। और साथ ही इन जगहों के विकास के बाद बिहार में टूरिज्म की और ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभवना बढ़ेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *