बिहार में बढ़ते शराब तस्करी को देखते हुए नीतीश कुमार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने बिहार में शराबबंदी की है लेकिन घर में Home Delivery के जरिये शराब माफिया अपनी रोटी सेक रहे हैं। लेकिन अब नीतीश कुमार ने इन लोगों पर नकेल कसने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने शराबबंदी पर नकेल कस्ते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी केके पाठक (IAS KK Pathak) को निबंधन, उत्पाद और मद्यनिषेध विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया है।
सामान्य प्रशासन विभाग (Department of General Adminstration) ने बुधवार,17 नवंबर को इससे जुड़ी अधिसूचना को जारी किया है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से बिहार लौटे केके पाठक अपने पोजीशन के लिए वेटिंग पर थे। लेकिन 17 नवंबर को केके पाठक को जिम्मेवारी मिलने के साथ ही पहले से निबंधन, उत्पाद और मद्यनिषेध का अतिरिक्त प्रभार देख रहे अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद को इस विभाग से छुट्टी दे दिया गया है।

आपको बता दें कि जब बिहार में शराबबंदी लागू हुआ था उस वक़्त केके पाठक ही उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव थे। जब बिहार में शराबबंदी शुरू हुआ था तब बिहार में शराबबंदी को सफलतापूर्वक लागू कराने में इनकी अहम भूमिका थी। इनके इसी योगदान को देखते हुए सुशासन की सरकार ने एक बार फिर से उन्हें इस विभाग में अपर मुख्य सचिव का जिम्मा सौपा है।
आपको बता दें कि केके पाठक 1990 बैच के IAS अधिकारी हैं। उप्र के रहने वाले हैं इस रॉबिनहुड IAS का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छे माफियाओं के छक्के छूट जाते हैं। 2015 में जब महागठबंधन वाली सरकार सत्ता में आई थी तब के के पाठक दिल्ली में नियुक्त थे। जिसके बाद उन्हें बिहार में वापस बुलाया गया। के के पाठक जिद्दी और जुनूनी अधिकारी में गिने जाते हैं। अब एक बार फिर सीएम नीतीश कुमार ने अपने पुराने अधिकारी पर भरोसा जताया है और उन्हें राज्य में शराबबंदी को सफल बनाने की कमान सौंपी है।
