देश में अपना राजनीतिक अस्तित्व खोटी जा रही कांग्रेस को बिहार से झटका लगा है। राज्य में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस के खाते वाली एक सीट पर राज्य में उसकी साझेदार राजद ने भी अपना उम्मीदवार उतार दिया है। इस वाकिये पर बिहार में पक्ष-विपक्ष दोनों खेमो के दल कांग्रेस को नसीहत देने में लगे हैं। जान अधिकार पार्टी के प्रमुख राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पुरे प्रकरण को कांग्रेस को राजद से अलग होने की सलाह दे डाली। पप्पू यादव ने कहा की अब राजद को टिकट बेचने वाले दल से छुटकारा पा लेना चाहिए। उन्होंने यह तक कह डाला की अंदर ही अंदर भाजपा और राजद में सियासी खिचड़ी पक रही है।
पुरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने पुरे प्रकरण को कांग्रेस की बेइज़्ज़ती करार दिया। पुरे प्रकरण पर उन्होंने कहा, राजद ने कांग्रेस को उसकी हैसियत बता दी। अब अगर कांग्रेस आलाकमान अब भी राज्य में राजद के साथ बने रहना चाहते हैं तो यह दीगर बात है। वैसे आज की बेइज़्ज़ती के बाद कांग्रेस नेतृत्व को बिना विलम्ब करते हुए राजद से अपना गठबंधन तोड़ लेना चाहिए। शायद कुछ लाज बच जाए।
पप्पू यादव ने राजद का नाम लिए बगैर कहा की अब समय आ गया है की कांग्रेस एक कठोर फैसला ले। अब उसे ठेकेदार, बटमार से पैसे लेकर टिकट बेचने वाले दल से छुटकारा पा लेना चाहिए। उन्होंने कहा की इनका भाजपा से अंदरूनी तालमेल चल रहा है। यह दल ईडी, सीडी, सीबीआइ और आइटी के डर से पीएम का पालतू बना हुआ है। कांग्रेस के फैसले से बिहार को नई दिशा मिलेगी और कई दशक के घुटन से मुक्ति मिलेगी।

