पटना में चुनावी सरगर्मी के बीच महागठबंधन के भीतर तनाव और टकराव अब खुलकर सामने आने लगा है। वैशाली जिले के महनार में लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव को गुरुवार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। चुनावी सभा खत्म होते ही तेजप्रताप के काफिले पर भीड़ ने “तेजस्वी जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए पत्थरबाजी की। आक्रोशित समर्थकों ने उनके काफिले को कुछ दूर तक खदेड़ भी दिया। सुरक्षा बलों की मदद से किसी तरह तेजप्रताप को वहां से सुरक्षित निकाला गया।

बगावत के बाद बढ़ा छाई विरोध की आग

तेजप्रताप यादव, जो कभी राजद के प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे, अब जनशक्ति जनता दल नाम की पार्टी बनाकर महुआ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। राजद और अपने परिवार से अलग होने के बाद यह पहला मौका है जब जनता के बीच उनके खिलाफ इतना आक्रोश देखा गया। यह घटना न केवल उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाती है, बल्कि राजद के भीतर गहराते अंतर्विरोधों की भी झलक दिखाती है।

RJD की अनुशासन की लहर: 10 नेताओं की छुट्टी, संगठन में हड़कंप

इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल ने भी चुनाव से पहले संगठन में बड़ी सर्जरी की है। पहले चरण के मतदान से ठीक पहले पार्टी ने 10 नेताओं को निष्कासित कर दिया है, जिनमें एक सिटिंग विधायक, दो पूर्व विधायक और एक महिला नेता भी शामिल हैं। इससे पहले भी पार्टी 27 नेताओं को 6 साल के लिए बाहर कर चुकी थी। पार्टी के अनुसार, यह कदम अनुशासन बनाए रखने और विवादित बयानों पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है।

विवादित बयानों पर गिरी गाज

डेहरी के विधायक फतेह बहादुर सिंह, जिन्होंने हाल ही में “ब्राह्मणों को देश से निकाला जाए” और “मंदिर अंधविश्वास का प्रतीक हैं” जैसे विवादित बयान दिए थे, उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया गया है। निष्कासित नेताओं में सतीश कुमार, मो. सैयद नौसादुल नवी उर्फ पप्पू खां, मो. गुलाम जिलानी वारसी, मो. रियाजुल हक राजू, अमोद कुमार मंडल, जिप्सा आनंद, वीरेंद्र कुमार शर्मा, ई. प्रणव प्रकाश और राजीव रंजन उर्फ पिंकू जैसे नाम शामिल हैं।

तेजस्वी का पलटवार: ‘नीतीश अब बिहार चलाने की स्थिति में नहीं’

तेजस्वी यादव ने इस बीच भाजपा और नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला है। महागठबंधन की शक्ति प्रदर्शन रैली से पहले उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार अब बिहार चलाने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सिर्फ उन्हें एक “चेहरा” बनाकर इस्तेमाल कर रही है और अब बिहार को नए नेतृत्व की जरूरत है।

कांग्रेस की तख्तबाजी: ‘मोदी-जुमलेबाजी से जनता को गुमराह कर रहे हैं’

कांग्रेस नेता भी इस चुनावी माहौल में आक्रामक रुख में दिखे। अशोक गहलोत ने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह जनता को भ्रमित करने के लिए जुमलेबाजी करते हैं। वहीं कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने दावा किया कि बिहार की जनता इस बार सोच-समझकर वोट देगी और महागठबंधन मजबूती से चुनाव जीतने जा रहा है।

VIP प्रमुख का वार: राहुल ने सच कहा, मोदी सिर्फ वोट की राजनीति करते हैं

विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत बात नहीं कही। उनके अनुसार, मोदी वोट के लिए कुछ भी कर सकते हैं लेकिन राज्य के विकास से उनका कोई सरोकार नहीं है।

बिहार की राजनीति अब केवल चुनाव नहीं, भरोसे और नेतृत्व की है असीम परीक्षा

बिहार की राजनीतिक सरगर्मी इस वक्त केवल वोटों का मुकाबला नहीं रह गई है, बल्कि यह भरोसे और नेतृत्व की परीक्षा बन चुकी है। तेजस्वी यादव अपनी आक्रामकता और शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से खुद को महागठबंधन का नेतृत्वकर्ता साबित करने में जुटे हैं, वहीं उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव की नाराजगी और जनता के विरोध ने संगठन के भीतर गहराई तक दरारें खोल दी हैं। RJD की अनुशासनात्मक कार्रवाइयां, नेताओं को बाहर करना और विवादित बयानों पर नियंत्रण लगाना यह दिखाता है कि पार्टी भीतर से अपने ढांचे को मज़बूत करने की कोशिश में है, लेकिन साथ ही यह भी साफ करता है कि अंदरूनी कलह और अलगाव राजनीतिक स्थिरता को चुनौती दे रहे हैं।

कांग्रेस और VIP जैसी सहयोगी पार्टियों के बयान और मोदी-बीजेपी की चुनावी रणनीति ने सियासी समीकरण और जटिल बना दिए हैं। इन सब घटनाओं को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बिहार में सत्ता केवल बहुमत की लड़ाई नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास, नेतृत्व की क्षमता और गठबंधन की एकता की कसौटी है। आने वाले चुनाव परिणाम तय करेंगे कि महागठबंधन अपनी एकजुटता बनाए रख पाता है या भीतर की खींचतान और विरोधी हमलों के बीच सत्ता की राह फिर से बिखर जाएगी।