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पटना से रांची की बीच की यात्रा को सुगम और आसान बनाने के लिए भारतीय रेल अब एक नए रूट का निर्माण करने जा रहा है। जहां वर्त्तमान रूट से सफर करने में 13 घंटे लगते हैं वहीं इस रूट के बन जाने से 11 घंटे लगेंगे। परियोजना का 90 प्रतिशत काम पुर हो चूका है और इस रूट के दिसंबर 2021 तक बन जाने की सम्भावना है। पटना से रांची के बीच चलने वाली ट्रेनों को अब गोमो और बंगाल के झालदा से होकर नहीं जाना पड़ेगा। कोडरमा से सीधा हज़ारीबाग़ और बरकाकाना से सीधा रांची। पटना-रांची रेलखंड के कोडरमा स्टेशन को डेस्टिनेशन हब बनाया जाएगा। आने वाले दिनों में कोडरमा स्टेशन रेलवे हब के रूप में स्थापित होगा।

दूसरी ओर पटना से रांची का सफर अब रोमांचक भी हो जाएगा। पटना से रांची के बीच 328 की दुरी है जिसमे से 63 किलोमीटर पहाड़ों से घिरी है। अब यात्रियों के लिए ये 63 किलोमीटर किसी हिल स्टेशन से कम नहीं होंगे। वर्त्तमान में मूर्ति के बाद पश्चिम बंगाल के कई स्टेशनो से गुज़रते हुए वाया बोकारो-गोमो-कोडरमा व इससे आगे की यात्रा करने के बाद ट्रेने रांची पहुँचती हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार बिहार के अलावा झारखंड से ओडिशा व उत्तरी भारत से आने जाने वाली माल गाड़ियों के लिए भी इस रूट का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ में रांची-मुरी-बोकारो-गोमो-कोडरमा सेक्शन पर रेलवे ट्रैफिक कम होगा।

नयी रेलवे लाइन तीन सुरंगो से होकर गुज़रेंगी। सुरंगो से निकलने के बाद त्रिने दो पहाड़ियों के बीच बने पुल से होकर गुज़रेंगी। पूर्व मध्य रेल से सीपीआरओ राजेश कुमार के अनुसार कोडरमा-बरकाकाना रेलखंड के अलावा इस्लामपुर-नटेशर नए सेक्शन पर भी निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। इस सेक्शन का काम पूरा होते ही पटना-रांची के बीच एक रूट का विकल्प उपलब्ध होगा। कोडरमा से एक लाइन गोमो, दूसरी हजारीबाग टाउन, तीसरी गिरीडीह होते हुए मधुपुर और चौथी गया जुड़ी हुई है। कोडरमा तिलैया से भी जुड़ जाएगा। बरकाकाना के बाद टाटी सिल्वे और सांकी स्टेशन के बीच काम फाइनल स्टेज में है। जल्द ही यह रेलखंड रांची तक जुड़ जाएगा।

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