जन अधिकार पार्टी (जाप) के अध्यक्ष और पूर्व सांसद रह चुके राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव को तीन दशक पुराने अपहरण मामले में 12 मई को पटना से गिरफ्तार किया गया था। कुल 5 महीने पुरे होने के बाद सोमवार यानि 04 अक्टूबर को इस मामले की अंतिम सुनवाई रखी गई थी। जिसके बाद से अदालत ने पप्पू यादव को बाइज्जत बरी कर दिया है।
दरअसल, 32 साल पुराने एक अपहरण के केस में जाप प्रमुख पप्पू यादव को इस साल कोरोना काल में गिरफ्तार किया गया था। अगर विस्तारपूर्वक बताएं तो 32 साल पहले 29 जनवरी 1989 में मधेपुरा के मुरलीगंज थाने में एक अपहरण का केस दर्ज़ हुआ था। जिसे एक शैलेंद्र यादव नामक व्यक्ति ने करवाया था। शिकायत यह थी कि पप्पू यादव और उनके अन्य चार साथियों ने मिलकर, राजकुमार यादव और उमा यादव नाम के दो व्यक्तियों का अपहरण किया था। पप्पू यादव के खिलाफ मधेपुरा के कुमारखंड थाना कांड संख्या 9/89 दर्ज था।
जिसके बाद से इस मामले में मधेपुरा कोर्ट (Madhepura) में जनप्रतिनिधियों के विशेष अदालत एडीजे 3 निशिकांत ठाकुर ने फैसला सुनाया है। सोमवार के दिन इस मामले को लेकर जन प्रतिनिधियों के मुकदमे से संबंधित मामलों की सुनवाई रखी गई थी। मधेपुरा की विशेष अदालत- सह एडीजे-3 की कोर्ट में निशिकांत ठाकुर के सामने पप्पू यादव को उपस्थित करने को बोला गया था। इसके बाद से 30 सितम्बर के दिन कोर्ट में इस मुद्दे को लेकर बहस हुई। और अब आख़िरकार उन्हें रिहा करने का निर्णय लिया गया।

