जब अक्तूबर की ठंडी हवाओं में घर की याद घुलने लगती है, जब माँ के हाथों के ठेकुआ की खुशबू हवा में तैरती है, तब समझिए — छठ आ रहा है | और इस बार, उस घर वापसी को आसान बनाने का जिम्मा फिर से भारतीय रेलवे ने अपने कंधों पर लिया है|
त्योहारों के इस मौसम में रेलवे ने दिल से एक वादा किया है कि “कोई माँ इस बार अपने बेटे के बिना अर्घ्य न दे, कोई बेटी अपने घर लौटने को तरसे नहीं|”
इसी भावना के साथ भारतीय रेलवे 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक 12,000 से अधिक विशेष ट्रेनें चला रहा है| आने वाले सिर्फ पाँच दिनों में ही 1,500 स्पेशल ट्रेनें देश के अलग-अलग हिस्सों से रवाना होंगी ताकि हर कोई अपने घर, अपने घाट, अपनी मिट्टी तक पहुँच सके|
रेल मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि इस त्योहारी सीजन में रेलवे ने बीते इक्कीस दिनों में 4,493 विशेष ट्रिप्स पूरे किए हैं| इन ट्रेनों ने लाखों यात्रियों को सुरक्षित घर तक पहुँचाया, जहाँ उनके लिए दीये जल रहे थे, और माँ के आँखों में इंतज़ार की चमक थी |
इस बार का आयोजन पिछले वर्षों के मुताबिक काफ़ी विशेष है | पिछले साल जहाँ करीब सात हज़ार विशेष ट्रेनें चली थीं, वहीं इस साल यह संख्या बारह हज़ार के पार पहुँच चुकी है | यह सिर्फ आँकड़े नहीं हैं, यह उस भरोसे की कहानी है जो देश के कोने-कोने में रेलवे और जनता के बीच बुनी जा रही है |
19 अक्टूबर को गुजरात के उधना स्टेशन पर एक दृश्य देखने लायक था — प्लेटफॉर्म पर भीड़ थी, पर अफरा-तफरी नहीं | हर चेहरे पर एक उम्मीद थी और रेलवे की व्यवस्था ने उस उम्मीद को टूटने नहीं दिया| तीस हज़ार से अधिक यात्रियों ने उस दिन घर की राह पकड़ी, और शाम तक सब अपने गंतव्य की ओर रवाना हो चुके थे| किसी ने कहा, “पहली बार भीड़ में भी सुकून था, हर कोई संभाल रहा था, जैसे हर कोई अपना हो| ”
जबलपुर स्टेशन से यात्रा कर रहे एक यात्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “स्टेशन पर इस बार नज़ारा बदल गया है, अब धूल नहीं, सफाई दिखती है|ट्रेन में सिर्फ सफर नहीं, अपनापन महसूस हुआ|”
बेंगलुरु से कोलकाता जा रहे एक बुज़ुर्ग यात्री बोले, “स्टाफ का व्यवहार इतना अच्छा था, मानो कोई परिवार का सदस्य हो| अब सफर सिर्फ रेल का नहीं, दिलों का भी हो गया है|”
अहमदाबाद स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा इस बार विशेष सहायता डेस्क बनाई गई | दिव्यांग और बुज़ुर्ग यात्रियों को गाड़ी तक पहुँचाने के लिए जवान खुद उनका हाथ थामे चलते दिखे | कोई जल्दी नहीं थी, कोई हड़बड़ी नहीं — सिर्फ संवेदनशीलता थी|
पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने बताया कि बिहार में छठ पूजा के दौरान आने-जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए हर प्रमुख टर्मिनल पर होल्डिंग एरिया बनाए जा चुके हैं | उन्होंने कहा कि “इस बार ट्रेनें ही नहीं, तैयारी भी दोगुनी है | असली चुनौती वापसी की है, जब त्योहार खत्म होगा और लोग अपने काम पर लौटेंगे, लेकिन हम उसके लिए भी तैयार हैं|”
पटना के पटलीपुत्र रेल परिसर के द्वारा इस बार “केंद्रीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम” के ज़रिए हर प्रमुख स्टेशन पर कड़ी नज़र रखी जाएगी| छत्रसाल सिंह ने आश्वासन देते हुए कहा, “अगर कहीं भी बिना आरक्षण बड़ी संख्या में लोग आते हैं, तो तत्काल अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था की जाएगी ताकि कोई भी अपने घर लौटने से वंचित न रहे |”
रेलवे का यह प्रयास सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं है बल्कि एक भावनात्मक यात्रा है जो हर उस मुसाफिर के लिए है जिसने सालभर घर से दूर रहकर मेहनत की है वे अपनी मिट्टी की गंध , माँ के स्नेह में और अपने आँगन की छाँव में आराम कर सकें|
इस बार रेल की हर माँ के लिए एक दुआ है,
कि कोई माँ की दीपक सुनी न रहे|”
