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बिहार में लंबे वक्त से साइबर क्राइम, साइबर फ्रॉड जैसे कई मामले एक के बाद एक सामने आ रही है। कभी राज्य के अलग अलग जिलों से ठगी करने की खबर आती है, तो कभी दूसरे राज्य के अपराधी बिहार में साइबर ठगी का जाल बिछाते पकड़े जा रहे हैं। साइबर ठगी की तादात इतनी बढ़ गई है कि प्रशासन ने भी अब जांच पड़ताल में सख्त रूप धारण कर लिया है।

इस साल केवल जुलाई के महीने तक पूरे देश में साइबर क्राइम के मामले 800 के पार दर्ज़ की गई है। वहीं अपने पदेश की बात करें तो कुछ दिनों पहले बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक प्रोफेसर और डॉक्टर के खाते से लाखों रुपए उड़ाने की खबर आई थी। वहीं दूसरी ओर गड़बनैली क्षेत्र के गांधीनगर गांव की निवासी किरण देवी के भी साइबर क्राइम के चंगुल में फस कर 50 हजार रुपए गवाने की ख़बर मिली थी। और तो और हाल ही में एक साइबर ठगी मामला सामने आया जिसमे अपराधी बंगाल के नक्सल प्रभावित इलाके से था। ऐसे और कई सारे मामले एक के बाद एक बिहार के कई जिलों से सामने आ रही है। इस तरह के लगातार बढ़ते मामलो से बिहार पुलिस भी अब परेशान हो चुकी है। अब पकड़े जाने वाले साइबर अपराधियों को पहले जेल भेजा जा रहा, और बाकी के जांच उसके बाद की जा रही हैं।

अब साइबर फ्रॉड करने वाले अपराधी पर कड़ा शिकंजा कसने में बिहार प्रशासन कोई कमी नही छोड़ रही है। हाल ही में कंकड़बाग थाने की पुलिस ने दूसरे के पहचान पत्र से बैंकों में ठगी कर पैसों का ट्रांसफर करने वाले आरोपित रोशन चंदा को शुक्रवार को ही जेल भेज दिया गया था। दरअसल शनिवार और रविवार मोहर्रम एवं रक्षाबंधन के कारण बैंक बंद थे। जिसके कारण जेल भेजते ही उस आरोपित के सारे बैंक खाते को सबसे पहले फ्रीज कराया गया। अब त्योहार खतम होने के बाद पुलिस उन बैंकों में जाकर अपराधी के खातों की गहन जांच करेगी। कंकरबाग थाना के प्रभारी रविशंकर सिंह का कहना है कि जांच के बाद बैंक से मिले डिटेल के मुताबिक जेल गए अपराधी पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।