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बिहार में इस सप्ताह के अंत तक मानसून के प्रवेश के आसार प्रबल हैं। देश के अन्य हिस्सों में पिछले एक-दो दिनों में समय पूर्व मानसून के पहुंचने के बाद इस बात की उम्मीद बढ़ गई है कि इस बार मानसून बिहार में समय से पूर्व पहुंचेगा। सूबे में मानूसन की पहली बारिश पूर्णिया में 13 जून को होती है लेकिन इस बार 12 जून तक मानसून की पहली बारिश के आसार जताए जा रहे हैं। इसके बाद पटना और गया में भी यह तय समय 16 जून से पहले ही पहुंचेगा। बिहार में मानसून झूमकर बरसेगा और शनिवार से राज्य के अधिकतर हिस्सों में तेज हवा के साथ झमाझम बारिश दर्ज की जाएगी।इस बार मानसून के लौटने की मानक तिथि में भी बदलाव किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के निदेशक विवेक सिन्हा ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है। 11 जून तक इसके विकसित होने के आसार हैं। इससे मानसून के प्रसार को बेहद अच्छी गति मिलेगी। चूंकि पश्चिम बंगाल के बागडोगरा में तीन दिन पहले यह मानसून पहुंचा है और हर तरह की परिस्थतियां मानसून के प्रसार को सपोर्ट कर रहीं हैं ऐसे में 12 जून तक मानसून का आगमन बिहार में हो जाना चाहिए। फिलहाल मानसून के प्रसार की परिस्थितियां हमारे पूर्वानुमान और कयासों के समर्थन में हैं।

जून में सामान्य से अधिक बारिश का पूर्वानुमान

निदेशक विवेक सिन्हा ने बताया कि भले ही पूरे मानसून सीजन में बिहार में मानसून की बारिश सामान्य से थोड़ी कम रहने का पूर्वानुमान पहले किया गया है लेकिन जून महीने में मानसून सूबे में जमकर बरसेगा। अगले कुछ दिनों में सूबे के कई भागों में मानसून की सामान्य से अधिक बारिश होगी। इससे पहले प्री मानसून की बारिश भी सूबे में होगी। मानसून की बारिश की औपचारिक घोषणा मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से दो दिन तक होने मानक के अनुसार वाली बारिश के आधार पर किया जाएगा।

नौ जून से राज्य के कुछ भाग में प्री मानसून बारिश

सूबे के अधिकतर भागों में अगले 24 घंटों के बाद बारिश के आसार हैं। मौसमविदों के अनुसार इसे प्री मानसून बारिश की श्रेणी में रख सकते हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से नौ जून से राज्य के अधिकतर हिस्सों में गरज तड़क के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है।

निदेशक विवेक सिन्हा ने बताया कि मई महीने में सूबे मे जमकर बारिश हुई। पिछले एक सप्ताह से विशेष बारिश न होने के बावजूद राज्य में तय मानक के अनुसार अब भी बारिश की प्रतिशतता ज्यादा है। चूंकि जून के पहले और दूसरे हफ्ते के आरंभ तक बिहार में बारिश ऐसे भी नहीं होती है। इसलिए पिछले दिनों ज्यादा बारिश न होने का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। एक अन्य मौसमविद ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से बारिश का न होना ज्यादा अच्छा रहा क्योंकि तकनीकी रूप से यह प्रमाणित है कि इससे मानसून की बारिश और अच्छी ही होगी।

मानसून के लौटने की मानक तिथि में हुआ बदलाव

पिछले साल मानसून के लौटने की मानक तिथि में भी बदलाव किया गया है। नए मानकों के मुताबिक पटना से तीन अक्टूबर की जगह आठ अक्टूबर, गया से तीन की जगह नौ अक्टूबर और पूर्णिया से आठ की जगह 10 अक्टूबर को मानसून विदा लेगा।

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