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जब भी हमारे देश में प्रदुषण की बात आती है तो पराली का नाम ज़रूर आता है। पराली उस फसल को कहते हैं जिसे काटने के बाद वह किसानो के किसी काम की नहीं रहती और किसान उसे जला देते हैं। ऐसे में आस पास की जगह पर पराली जलने से बहुत प्रदुषण होता है लेकिन बिहार के रोहतास में पराली प्रबंधन को लेकर एक नया तरीका खोज लिया गया है। इसको रोहतास मॉडल नाम दिया गया है। इस मॉडल की देश भर के कृषि वैज्ञानिको ने सराहना की है। इस मॉडल को राष्ट्रिय पुरस्कार द्वारा भी नवाज़ा जा चूका है। अब राज्य सरकार बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए अपने इस मॉडल को पुरे राज्य में लागु करने जा रही है। यह मॉडल किसानो की आमदनी बढ़ाने के साथ साथ उनके लिए रोज़गार के नए मौके भी मुहैया कराएगा।

पराली को बिहार सरकार ने एक बहुत बड़ी चुनौती माना है। इसी कारण राज्य के कृषि विभाग ने इससे जुड़े अभिनव प्रयोगो को ज़मीन पर उतारने की ज़िम्मेदारी बीएयू को दी है। इसी कड़ी में रोहतास मॉडल को राज्य भर में विस्तार देने का कार्य प्रगति पर है। बीएयू के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ आरके सोहाने ने सभी केवीके को इसके लिए पत्र लिखा है।

क्या है रोहतास का केवीके मॉडल-
किसानो को बेलर नामक मशीन से उच्च दबाव के साथ पराली का एक कंप्रेस्ड बंडल बनाना होता है। इसे चारा ब्लॉक नाम दिया गया है। इससे बेचने पर कम से कम डेढ़ गुना कीमत मिलती है यहां तक की इसके ऑफ सीजन में इसकी दोगुनी कीमत तक मिल जाती है। बेलर मशीन किसान खुद भी खरीद सकते हैं सरकार इसपर 75 फीसद अनुदान देती है।

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