बिहार में कोरोना काल के दौरान बच्चों के अस्पतालों में जन्म की संख्या में कमी आ गयी है। राज्य में कोरोना की पहली लहर के दौरान संस्थागत प्रसव की संख्या में कमी दर्ज की गई है। वहीं, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कोरोना के तेज संक्रमण के दौरान भी अस्पतालों में प्रसव के लिए जाने वाली महिलाओं की संख्या कम हो गयी है।
राज्य में कोरोना संक्रमण को लेकर पिछले एक साल में 25,281 बच्चों का कम जन्म हुआ। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य में 2019 -20 के दौरान अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच 18 लाख 71 हजार 740 बच्चों का जन्म हुआ था। जबकि वर्ष 2020-21 के दौरान अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच 18 लाख 46 हजार 459 बच्चों का जन्म हुआ है।
स्वास्थ्य उप केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद होने से परेशानी बढ़ी
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य उप केंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यक चिकित्सकीय सहायता और दवाएं उन तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। आशा और एएनएम को भी कोरोना नियंत्रण कार्य में लगाए जाने के कारण महिलाओं को प्रखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जाना पड़ रहा है।
वर्ष 2018- 19 में करीब 17 लाख बच्चों का हुआ संस्थागत प्रसव
कोरोना महामारी के पूर्व वर्ष 2018- 19 में करीब 17 लाख बच्चों का संस्थागत प्रसव हुआ था। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2018- 19 में 16 लाख 84 हजार 128 बच्चों का जन्म हुआ था। विभागीय सूत्रों के अनुसार राज्य में करीब ढाई लाख बच्चों का जन्म घरों में महिलाओं के सहयोग से होता है। कई बार प्रशिक्षित महिलाएं भी प्रसव कार्य कराती हैं।
करीब 25 लाख महिलाएं होती है हर वर्ष गर्भवती
सूत्रों के अनुसार करीब 25 लाख महिलाएं हर वर्ष राज्य में गर्भवती होती हैं। इनमें करीब 2 से 3 लाख महिलाओं को विभिन्न कारणों से प्रसव में बाधा आती है।

