जैसा कि पिछले 1 महीने से बिहार में बालू के अवैध खनन का मामला किसी से छुपाए नहीं छुपा है। ऐसे में अब अवैध खनन करने वाले माफियाओं के साथ पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत भी लगातार सामने आ रही है। हालांकि कई पुलिसवाले और खनन अधिकारियों को सस्पेंड भी किए जा चुका हैं। लेकिन उसके बावजूद यह कारोबार बंद होने का नाम नही ले रहा। एक के बाद एक नया मामला सरकार और प्रशासन के सामने आता दिख रहा है।
एक बार फिर तस्करी के साथ-साथ अवैध कमाई के लिए भी एक नया खेल सामने आता दिख रहा है। पिछले 5 वर्षों के दौरान अवैध खनन के नाम पर लगभग 5 करोड़ से अधिक बालू जब्त हुई है। और जानकारी के हिसाब से इस बार भी अवैध खनन में तस्करों, पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत देखी गाय है। यह कांड बांका, जमुई, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर जिले की बताई जा रही है। फिलहाल इस मामले पर आर्थिक अपराध इकाई अपनी जांच-पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इसमें पूर्व थानेदार, खनन विभाग के अधिकारी सहित कई अन्य अधिकारियों का भी हाथ था, जिपर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।
कुछ दिनों पहले भी बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (यूओयू) ने पूर्व डेहरी उपमंडल अधिकारी (एसटीओ) सुनील कुमार सिंह से संबंधित करोड़ों की अवैध संपत्ति का पता लगाने का दावा किया था।जिसके लिए गाज़ीपुरमें स्थित उनके पुस्तैनी घर, पटना के फ्लैट और उनके ऑफिस में छापेमारी की गई थी। छापे में यह बात सामने आई कि वह ज़मीन जयदात का कारोबार में भी शामिल थे जिसके अंतर्गत अवैध बालू का इस्तेमाल भी होता था। इतना ही नही बल्की अवैध बालू खनन के माफियाओं को कथित रूप से मदद करने और उन्हें उकसाने के आरोप में एसटीओ (सुनील कुमार) सहित डीएसपी को भी निलंबित कर दिया गया था।

