वॉशिंगटन डी.सी. में राष्ट्रीय गार्ड के दो सैनिकों पर हुए भीषण हमले के बाद अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों को अचानक और अभूतपूर्व रूप से सख्त कर दिया है। इस हमले में एक सैनिक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया, और घटना का आरोपी अफगान मूल का बताया गया है। इस घटना को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा” मानते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए और उन 19 देशों के प्रवासियों की सभी इमिग्रेशन प्रक्रियाओं को रोक दिया जिन्हें पहले से उच्च जोखिम वाला माना गया था। इस निर्णय ने देश में रहने वाले हजारों प्रवासियों और उनके परिवारों में अनिश्चितता, डर और तनाव की स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि अब न केवल नए आवेदन बल्कि मौजूदा मामलों को भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

USCIS के नीति मेमो में बड़े बदलाव, इमिग्रेशन लाभों की दोबारा जांच अनिवार्य

यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ USCIS ने अपनी वेबसाइट पर एक विस्तृत नीति मेमो जारी किया, जिसमें बताया गया कि इन 19 देशों से आने वाले सभी प्रवासियों के ग्रीन कार्ड, नागरिकता, स्टेटस अपडेट और अन्य इमिग्रेशन लाभों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। USCIS का कहना है कि अब इन प्रवासियों के पिछले कई वर्षों के आवेदन भी दोबारा जांचे जाएंगे। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक ऐसे प्रवासी का इंटरव्यू या जरूरत पड़ने पर दोबारा इंटरव्यू भी किया जाएगा, चाहे उनके दस्तावेज पहले से सत्यापित हो चुके हों। यह निर्णय विशेष रूप से उन लोगों पर लागू होगा जो 20 जनवरी 2021 यानी बाइडेन प्रशासन की शुरुआत के बाद अमेरिका में प्रवेश किए हैं। USCIS ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सभी मंजूर किए गए मामलों का पुनर्मूल्यांकन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

इस कार्रवाई के दायरे में वे 12 देश शामिल हैं जिन पर इस वर्ष यात्रा प्रतिबंध लगाया गया था और वे 7 देश जिन पर सीमित प्रवेश की पाबंदियां लगाई गई थीं। यात्रा प्रतिबंध वाले देश हैं अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, रिपब्लिक ऑफ कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन। वहीं सीमित प्रवेश वाले देशों में शामिल हैं बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला। इन सभी देशों को प्रशासन ने उच्च जोखिम वाला बताया है। इस निर्णय का असर अमेरिका में पहले से बसे हुए हजारों परिवारों पर पड़ेगा जो वर्षों से अपनी नागरिकता, ग्रीन कार्ड या अन्य इमिग्रेशन लाभों के इंतजार में हैं। अब इन सभी मामलों को तब तक रोका जाएगा जब तक USCIS के निदेशक जोसेफ एड्लो इस रोक को हटाने का निर्णय नहीं लेते।

पहले से अमेरिका में रहने वाले प्रवासियों पर भी सख्ती, जांच का दायरा व्यापक हुआ

ट्रंप प्रशासन के इस कदम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब वे प्रवासी भी जांच के दायरे में आएंगे जो कई वर्ष पहले अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और यहां स्थिर जीवन जी रहे हैं। पहले जब यात्रा प्रतिबंध लागू किया गया था, तब जो लोग पहले से अमेरिका में थे उन्हें कोई अतिरिक्त जोखिम श्रेणी में नहीं रखा गया था। लेकिन अब USCIS ने घोषणा की है कि बाइडेन प्रशासन के दौरान आए सभी शरणार्थियों, परिवारों और व्यक्तिगत प्रवासियों के मामलों की पूरी समीक्षा की जाएगी। इसके परिणामस्वरूप हजारों लोग जिन्हें अब तक उम्मीद थी कि उनका ग्रीन कार्ड या नागरिकता प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, अब भारी अनिश्चितता में हैं। इस निर्णय से उन लोगों का भी दिल दहल गया है जिनके परिवार के सदस्य अमेरिका में किसी अन्य इमिग्रेशन प्रक्रिया पर निर्भर हैं।

90 दिनों में प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी, संभावित कानूनी कार्रवाई का भी संकेत

USCIS ने अपने नीति दस्तावेज में कहा है कि 90 दिनों के भीतर एक विस्तृत प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी जिसमें यह तय होगा कि किन प्रवासियों की जांच सबसे पहले की जाएगी। जिन मामलों में किसी भी तरह का जोखिम या संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिलेंगे उन्हें तुरंत इमिग्रेशन एन्फोर्समेंट एजेंसियों या अन्य संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रेफर किया जा सकता है। यह आशंका कई लोगों को और डरा रही है क्योंकि इससे भविष्य में हिरासत, पूछताछ, लंबी कानूनी लड़ाई या यहां तक कि निर्वासन तक की स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। कई प्रवासी परिवारों ने कहा है कि वे वर्षों से अच्छे रिकॉर्ड के साथ अमेरिका में रह रहे हैं, काम कर रहे हैं और टैक्स दे रहे हैं, लेकिन अब उन्हें भी जांच का सामना करना पड़ेगा।

इस बड़े निर्णय के साथ ही ट्रंप प्रशासन ने कई और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पिछले सप्ताह USCIS ने सभी आश्रय से जुड़े मामलों को रोक दिया था, जिससे हजारों लोग जो persecution से बचकर अमेरिका पहुंचे थे, अनिश्चितता में घिर गए। स्टेट डिपार्टमेंट ने भी घोषणा की कि अफगान नागरिक जिन्‍होंने वर्षों तक अमेरिकी सेना की सहायता की थी, उनके वीजा भी अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं। इस कदम की कई विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा आलोचना की जा रही है क्योंकि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य उन लोगों की रक्षा करना था जिन्होंने अमेरिका का साथ दिया और अब अपने मूल देशों में खतरे का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, USCIS ने कहा कि बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका में प्रवेश पाए सभी शरणार्थियों की फाइलें भी समीक्षा के लिए दोबारा खोली जाएंगी।

आलोचकों का आरोप, यह सामूहिक सजा है, सुरक्षा के नाम पर समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है

ट्रंप प्रशासन के इस फैसले के बाद आलोचनाओं की लहर तेज हो गई है। कई मानवाधिकार और प्रवासी अधिकार संगठनों का कहना है कि यह कदम सामूहिक सजा जैसी कार्रवाई है जिसमें लाखों लोगों को केवल उनके देश की उत्पत्ति के आधार पर दंडित किया जा रहा है। आलोचक यह भी कह रहे हैं कि किसी एक हमले के आधार पर पूरी समुदाय को संदिग्ध बना देना न्यायसंगत नहीं है और यह नीति मानवतावादी सिद्धांतों के खिलाफ है। कई संगठनों ने कहा कि यह निर्णय अमेरिका की परंपरागत “इमिग्रेंट नेशन” की छवि पर भी गहरा धब्बा छोड़ता है। वहीं प्रशासन का तर्क है कि यह कदम केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है और इसका धर्म या जातीयता से कोई संबंध नहीं है।