चुनावी रणभूमि में फिर गूंजेगा ‘मोदी-मोदी’, तेजस्वी ने साधा निशाना
बिहार की राजनीति में तापमान इस वक्त किसी जून की दोपहर से कम नहीं। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छठ के बाद फिर से बिहार आने की तैयारी में हैं, तो दूसरी ओर पटना की गलियों और दीवारों पर लाल रंग में चमकता नया पोस्टर लगा है “बिहार का नायक – तेजस्वी यादव”। यह पोस्टर सिर्फ एक दीवार पर चिपका कागज़ नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच छिड़ी मनोवैज्ञानिक जंग का प्रतीक बन गया है। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी अपनी रैलियों से “विकास और स्थिरता” का संदेश दे रहे हैं, तो दूसरी ओर तेजस्वी यादव “परिवर्तन और नई पीढ़ी के नेतृत्व” की आवाज़ उठा रहे हैं। बिहार की जनता अब इन दोनों आवाज़ों के बीच खड़ी है— एक ओर बीते दशक का विकास मॉडल, और दूसरी ओर बदलाव की नई उम्मीद।
30 अक्टूबर को फिर बिहार में पीएम मोदी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री मोदी 30 अक्टूबर को बिहार लौटेंगे । उनका पहला कार्यक्रम मोतीपुर, मुजफ्फरपुर में होगा, फिर छपरा की धरती से एनडीए के पक्ष में माहौल गर्म करेंगे। इसके बाद नवंबर में उनकी और भी सभाएं तय हैं। छठ के बाद मोदी का बिहार दौरा केवल एक धार्मिक संयोग नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बिहार में छठ पूजा आस्था और जनभावना का सबसे बड़ा पर्व है और ठीक उसी के बाद प्रधानमंत्री का दोबारा लौटना, यह संकेत देता है कि भाजपा इस बार “भक्ति और राजनीति” दोनों की धारा को एक साथ साधना चाहती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा एनडीए की चुनावी ज़मीन को और मजबूत करने का प्रयास है, खासकर उत्तर बिहार के उन क्षेत्रों में जहाँ जनसुराज और महागठबंधन का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। मोदी की सभाओं के ज़रिए भाजपा न सिर्फ मतदाताओं का रुझान फिर से अपने पक्ष में करना चाहती है, बल्कि यह भी संदेश देना चाहती है कि “दिल्ली से लेकर पटना तक, केंद्र और राज्य दोनों में एक ही दिशा हो और एक ही नेतृत्व।”
अमित शाह, नीतीश और सम्राट भी उतरे मैदान में, वहीं नित्यानंद राय का पलटवार
आज गृहमंत्री अमित शाह बिहारशरीफ के श्रम कल्याण मैदान से जनसभा करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बक्सर के डुमरांव में जनता से रूबरू होंगे। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सभा सदर विधानसभा के छक्का हाता में होगी। यानी पूरी एनडीए एक साथ पूरे जोश में मैदान में उतर चुकी है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने साफ शब्दों में कहा कि “तेजस्वी यादव विकास की बात नहीं करेंगे। वे डकैती करवाएंगे, गरीबों की जमीन हड़पवाएंगे, अपहरण का उद्योग लगाएंगे। भाजपा और नीतीश सरकार ने 20 साल में जो काम किया, वह उनकी सोच से भी परे है।”
वहीं भाजपा नेता विवेक ठाकुर ने निशाना साधते हुए कहा कि , “नीतीश कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा लड़ाई लड़ी है। तेजस्वी का परिवार तो आधा समय जेल और आधा समय बेल पर रहता है। बिहार अब इन झूठी बातों में फंसने वाला नहीं। इनका क्या है आधा समय जेल, आधा समय बेल।”
रवि किशन ने नीतीश पर जताया भरोसा
भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा कि ,“नीतीश कुमार कभी झूठ नहीं बोलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। यह बात पूरा भारत और पूरा बिहार जानता है। नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री रहेंगे।”
रवि किशन का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की छवि पर मुहर जैसा है। भाजपा अब खुले तौर पर यह संदेश दे रही है कि एनडीए की चुनावी रणनीति चेहरा बदलो की नहीं, बल्कि ‘भरोसा दोबारा दो’ की है। यह वही भरोसा है जिस पर नीतीश कुमार ने वर्षों तक सुशासन की इमारत खड़ी की और अब भाजपा उसी विरासत को अपने अभियान का आधार बना लिया है।
बिहार किसके साथ जाएगा — उम्मीदों के भरोसे या परिवर्तन के वादे पर
बिहार की सियासत अब सिर्फ कुर्सी की नहीं, बल्कि दिशा और विश्वास की लड़ाई बन चुकी है।
एक ओर मोदी-नीतीश की जोड़ी स्थिरता और विकास का भरोसा दिला रही है, तो दूसरी ओर तेजस्वी यादव बदलाव और नई पीढ़ी की राजनीति का सपना दिखा रहे हैं। यह चुनाव सिर्फ आज का नहीं, आने वाले बिहार का फैसला होगा।
