प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार शाम रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का स्वागत एक अत्यंत निजी और अनौपचारिक डिनर के साथ करेंगे। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक ऐसा मौका है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अनकही बातचीत का मंच माना जाता है। दोनों नेताओं के बीच बने व्यक्तिगत विश्वास के कारण ऐसे आयोजन कई बार बड़े निर्णयों का आधार बन जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस डिनर में भू-राजनीतिक परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक संघर्ष, रूस–यूक्रेन युद्ध से जुड़े भारतीय हित, स्टरलिंग भुगतान तंत्र, और एशिया–प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन जैसे गंभीर मुद्दों पर बातचीत होने की पूरी संभावना है। यह आयोजन उस निजी डिनर का प्रतिदान भी है, जो पुतिन ने 2024 में मॉस्को में मोदी के सम्मान में आयोजित किया था।
तीन वर्षों बाद भारत–रूस रिश्तों में नई गर्माहट
दिसंबर 2021 के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा है और इसलिए इसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक अहम पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है। पुतिन गुरुवार शाम दिल्ली पहुंचेंगे और महज़ 24 घंटे के इस संक्षिप्त लेकिन अत्यंत पैक्ड शेड्यूल में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम शामिल हैं। भारत–रूस संबंधों पर यूक्रेन युद्ध का असर, पश्चिमी देशों का दबाव, और बदले वैश्विक समीकरणों के बीच पुतिन का यह दौरा भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता (strategic autonomy) की नीति के प्रति दुनिया का ध्यान दोबारा आकर्षित कर सकता है। राजनयिकों का मानना है कि यह यात्रा कई ऐसी अहम राजनीतिक और आर्थिक बहसों को दिशा देगी, जो आने वाले महीनों में वैश्विक मंच पर दिखाई देंगी।
राजघाट से हैदराबाद हाउस तक कूटनीति की लंबी दिनचर्या
5 दिसंबर को पुतिन का दिन राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत से शुरू होगा, जहां तीनों सेनाओं का संयुक्त गार्ड ऑफ ऑनर उन्हें सलामी देगा। इसके बाद वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, जिसे भारत–रूस संबंधों की भावनात्मक जड़ माना जाता है। यहां से बातचीत का औपचारिक दौर हैदराबाद हाउस में शुरू होगा, जहां पहले लिमिटेड फॉर्मेट में सिर्फ दोनों नेता और कुछ चुनिंदा अधिकारी चर्चा करेंगे, फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर पर वार्ता होगी। यह वह चरण होगा जहां व्यापार संतुलन, रक्षा सहयोग, ऊर्जा साझेदारी, कृषि आयात–निर्यात, शिक्षा व अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में ठोस निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
पिछले वर्ष भारत–रूस व्यापार 68 अरब डॉलर पहुंचा, लेकिन इसमें भारत का निर्यात 5 अरब डॉलर से भी कम रहा। यह असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि रूस से कच्चे तेल के आयात ने व्यापार को रूस के पक्ष में झुका दिया है। ताजा वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय उत्पादों, दवाओं, कृषि उत्पादों, मशीनरी, आईटी सेवाओं, मोबाइल पार्ट्स और घरेलू उपकरणों को रूसी बाजारों में प्राथमिकता दिलाना होगा। भारत मंडपम में आयोजित होने वाला बड़ा बिजनेस कार्यक्रम दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों को एक नया मंच देगा, जहां उद्योगपति, निवेशक और नीति निर्माता शामिल होंगे। यह कार्यक्रम भविष्य में द्विपक्षीय व्यापार के ढांचे को बदलने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।
रूसी मीडिया नेटवर्क RT का भारतीय चैनल जल्द होगा लाइव
पूर्व जानकारी के अनुसार, पुतिन शुक्रवार को रूस के सरकारी अंतरराष्ट्रीय प्रसारण नेटवर्क RT के भारतीय संस्करण का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह कदम न केवल मीडिया आदान–प्रदान को बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक कहानी–कथन में भारत और रूस की साझेदारी को मजबूत करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि मीडिया सहयोग दोनों देशों की सॉफ्ट पावर रणनीति को नई दिशा देगा, खासकर ऐसे समय में जब विश्व मीडिया में रूस के दृष्टिकोण को लेकर बड़ी बहस चल रही है। पुतिन का यह कार्यक्रम ITC मौर्य होटल में होगा, जिसके तुरंत बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित भोज में वे शामिल होंगे।
पुतिन के भारत आने से पहले ही रूस की संसद डूमा ने RELOS समझौते को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस समझौते के तहत दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे के ठिकानों का उपयोग कर सकेंगी, सैन्य उपकरणों के लॉजिस्टिक्स और रखरखाव को आसान बनाया जाएगा, और संयुक्त अभियानों का संचालन अधिक सरल होगा। इसे अमेरिका के साथ भारत की LEMOA समझौते के समान बताया जा रहा है। इस समझौते का उद्देश्य युद्धपोतों, सैन्य विमानों और सैनिकों की आवाजाही को तेज़ और सुरक्षित बनाना है, जो भारत–रूस रक्षा सहयोग को और मजबूती देगा।
S-400, Su-57 और न्यूक्लियर रिएक्टर पर बड़े निर्णय संभव
वार्ता के दौरान S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की शेष इकाइयाँ, Su-57 स्टील्थ लड़ाकू विमान, और रूस द्वारा प्रस्तावित छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर भारत की मेन्यू लिस्ट में शामिल हैं। भारत अपनी सामरिक क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, और रूस इस यात्रा के दौरान इन परियोजनाओं में अधिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी की उम्मीद कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा रक्षा उत्पादन, तकनीकी ट्रांसफर, और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को नई ऊंचाई देगी।
