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पटना विश्विद्यालय में फणीश्वरनाथ रेणु की जन्मशती के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘रेणु-राग’ का आयोजन किया गया था। ये आयोजन हिंदी विभाग द्वारा पटना कॉलेज सेमिनार हॉल में हुआ। इस उदघाटन सत्र में माननीय शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, सुप्रसिद्ध साहित्यालोचक व लेखक पुरुषोत्तम अग्रवाल, पटना विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीशचन्द्र चौधरी, प्रख्यात कवि आलोकधन्वा, विधानपार्षद व आलोचक रामवचन राय, पद्मश्री उषाकिरण खान उपस्थित थे।

शिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी ने वक्तव्य की शुरुआत पटना कॉलेज के अपने छात्र जीवन की स्मृति से की और रेणु होने के अर्थ पर प्रकाश डालते हुए कहा “रेणु होने का अर्थ अपनी जमीन से जुड़ाव होना है। वे अपने सामाजिक राजनीतिक अनुभवों को व्यवहार में सीखने के हिमायती थे। रेणु जी का ही कथन है कि जूता पहनकर देखना चाहिए कि जूता काटता कहाँ है। रेणु ने अपने इस कथन की आजमाइश की थी। उन्होंने लेखन से लेकर राजनीति तक में स्वयं अनुभव हासिल किया था। हम चले जायेंगे लेकिन रेणु का साहित्य बचा रहेगा। रेणु के साहित्य को बचाना हमारी पीढ़ी की जिम्मेदारी है। हमारी पीढ़ी को रेणु का साहित्य बचायेगा।”

इस संगोष्ठी में बिहार तथा बाहर के विभिन्न विश्विद्यालयों से जुड़े साहित्यकार, आलोचक व प्रोफ़ेसर शामिल हुए। इसके साथ-साथ बड़ी संख्या में पटना विश्विद्यालय के छात्रों के अलावा साहित्य, संस्कृति से जुड़े बुद्धिजीवी, रंगकर्मी सामाजिक कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस सत्र का संचालन प्रोफ़ेसर दिलीप राम ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन में पटना कॉलेज हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ0 कुमारी विभा ने किया। इस सत्र के अंत में वक्ताओं से प्रश्न भी किया गया।

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