Mid-Day-Meal

भारत में कोरोना की शुरुआत होते ही देश में लॉकडाउन लगा दिया गया। जिस कारण पुरे देश भर के स्कूल कॉलेजों को बंद कर दिया गया था। साथ ही बिहार के प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मिड डे मील की सुविधा भी बंद कर दी गयी। लेकिन अब कोरोना की रफ़्तार काफी कम हो गयी है और इसी को देखते हुए एक खुशखबरी सामने आ रही है कि करीब पौने दो करोड़ बच्चों के लिए फिर से मिड डे मील की सुविधा शुरू की जाएगी।

बच्चों को मिलने वाली यह सुविधा इसी माह के अंतिम दिन यानी 28 फरवरी से पहली से आठवीं कक्षा तक में पढ़ने वाले बच्चों को उनके स्कूल में ही दोपहर का ताजा भोजन मिलने लगेगा। करीब दो साल से पके हुए मध्याह्न भोजन (MDM) का वितरण बंद है।

सोमवार, 14 फरवरी से राज्य के सभी प्रारंभिक विद्यालय शत प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलने लगे और पहले ही दिन मध्याह्न भोजन निदेशक सतीश चन्द्र झा ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस बाबत आदेश जारी कर दिया। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में मार्च 2020 से ही मध्याह्न भोजन का भौतिक रूप से संचालन बंद है।

हालांकि राष्ट्रीय खाद्या सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभुक बच्चों के अभिभावकों को सूखा राशन (चावल) और इसे पकाने (परिवर्तन मूल्य) का पैसा दिया जा रहा है। हाल ही में जनवरी से 15 फरवरी तक के 34 कार्यदिवसों के लिह अनाज और राशि बांटने का निर्देश अपर मुख्य सचिव ने दिया था। सोमवार को पीएम पोषण योजना के निदेशक सतीश चन्द्र झा ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देशित दिया है कि 28 फरवरी से पठन-पाठन के साथ-साथ भौतिक रूप से मध्याह्न भोजन योजना का संचालन कोरोना प्रोटोकॉल के तहत कराना सुनिश्चित करें। इसके अनुपालन में किसी भी तरह की कोताही बरदास नहीं की जाएगी। और इस निर्देश को गंभीरतापूर्वक लेते हुए नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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