CBSE ने जारी किए प्रैक्टिकल परीक्षा के विस्तृत दिशानिर्देश और SOPs

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 2026 की बोर्ड परीक्षा के लिए प्रैक्टिकल परीक्षा संबंधी दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) जारी कर दी हैं। ये दिशानिर्देश बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के लिए उपलब्ध हैं। बोर्ड ने विशेष रूप से यह जानकारी छात्रों को इस उद्देश्य से दी है कि प्रैक्टिकल परीक्षा निष्पक्ष, सुव्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा सके। SOPs में प्रैक्टिकल परीक्षा के समय, आंतरिक और बाहरी मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिकाओं की व्यवस्था, अंक अपलोडिंग प्रक्रिया और छात्रों के लिए आवश्यक सावधानियों का पूरा विवरण शामिल है।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि शीतकालीन सत्र वाले स्कूलों में प्रैक्टिकल परीक्षा 6 नवंबर से 6 दिसंबर 2025 तक आयोजित की जाएगी, जबकि नियमित सत्र वाले स्कूलों में यह परीक्षा 1 जनवरी से 14 फरवरी 2026 तक होगी। प्रैक्टिकल परीक्षा के साथ-साथ प्रोजेक्ट और आंतरिक मूल्यांकन भी इसी समय आयोजित किए जाएंगे। बोर्ड ने छात्रों को विशेष रूप से यह निर्देश दिया है कि वे परीक्षा से पहले अपनी पात्रता और बुनियादी दस्तावेजों की जाँच कर लें। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए है कि केवल योग्य और प्रमाणित छात्र परीक्षा में शामिल हों और उनका मूल्यांकन सही ढंग से हो।

कक्षा 10 और कक्षा 12 की प्रैक्टिकल परीक्षा में अंतर

कक्षा 10 के छात्रों के लिए बोर्ड प्रैक्टिकल उत्तर पुस्तिकाएँ प्रदान नहीं करेगा। स्कूलों को स्वयं इस व्यवस्था को सुनिश्चित करना होगा और परीक्षा आंतरिक परीक्षकों द्वारा आयोजित की जाएगी। इस कक्षा में किसी बाहरी परीक्षक की नियुक्ति नहीं होगी, जिससे मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल के भीतर नियंत्रित रहेगा। वहीं, कक्षा 12 के छात्रों के लिए बोर्ड हर स्कूल में बाहरी परीक्षकों की नियुक्ति करेगा। ये बाहरी परीक्षक प्रैक्टिकल परीक्षा और प्रोजेक्ट मूल्यांकन में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा, बाहरी परीक्षक छात्रों की प्रोजेक्ट रिपोर्ट और प्रदर्शन की विस्तृत जाँच करेंगे ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या पक्षपात की संभावना न रहे।

बोर्ड ने स्कूलों को यह निर्देश दिया है कि प्रैक्टिकल परीक्षा के अंकों को परीक्षा के तुरंत बाद ऑनलाइन अपलोड किया जाए। अपलोडिंग प्रक्रिया के दौरान स्कूल, आंतरिक परीक्षक और यदि लागू हो तो बाहरी परीक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक छात्र के अंक सही ढंग से अपलोड हों। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एक बार अंक अपलोड हो जाने के बाद उनमें कोई सुधार या बदलाव नहीं किया जाएगा। इससे छात्रों और स्कूल प्रशासन दोनों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। निजी छात्रों के अंकों का निर्धारण बोर्ड की नीतियों और परीक्षा बाईलॉज़ के अनुसार किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी कहा कि प्रैक्टिकल परीक्षा, प्रोजेक्ट और आंतरिक मूल्यांकन में निर्धारित अंक छात्रों को किसी भी स्थिति में सीधे नहीं बताए जाएंगे, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

छात्रों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से पहले सभी दिशानिर्देशों और SOPs को ध्यान से पढ़ें और आवश्यक तैयारी पूरी करें। इसमें प्रोजेक्ट रिपोर्ट, प्रयोगशाला उपकरण, प्रयोग सामग्री और समय पर उपस्थित होना शामिल है। स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी छात्रों को परीक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन और सहयोग मिले। इसके साथ ही, छात्रों को मानसिक रूप से भी परीक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि प्रैक्टिकल परीक्षा में समय प्रबंधन, अनुशासन और तकनीकी दक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है।

CBSE का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रैक्टिकल परीक्षा पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो। बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता को तुरंत रिपोर्ट किया जाए। छात्रों और स्कूल प्रशासन दोनों को सहयोग के लिए बोर्ड की वेबसाइट और स्थानीय शिक्षा अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखना चाहिए। यह व्यवस्था छात्रों के अधिकारों की रक्षा और परीक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।