पिछले दिनों उदयपुर में हुए कन्हैयालाल के दिन दहाड़े हत्या ने पुरे देश को हक्का बक्का कर दिया था। जिसके बाद दो धार्मिक समुदायों के बीच मन मुटाव की भावना बढ़ने लगी। कई राजनैतिक पार्टी देश में धर्म के नाम पर ही अपने वोट बैंक को बढ़ाती है। और दो धर्मों के बीच लड़ाई झगड़े के माहौल बनता जाता है। इसी बीच बिहार से इंसानियत की एक बड़ी खबर सामने आ रही है जो पूरे देश भर में इंसानियत की मिसाल बन रही है।
राजधानी पटना के राजा बाजार के सबनपुरा के एक मुस्लिम परिवार ने भाईचार और सौहार्द्र की मिसाल पेश की। परिवार ने हिंदू बुजुर्ग की अर्थी सजाने के बाद उसे कंधा देकर मुस्लिम लोगों ने अंतिम संस्कार किया। सबनपुरा के लोगों ने बताया कि मो. अरमान की दुकान पर 25 साल पहले रामदेव भटकते हुए आये थे। जिसके बाद रामदेव को अरमान ने काम पर रख लिया। तब से अब तक रामदेव मो. अरमान के यहां परिवार के सदस्य की तरह रहते थे।
शुक्रवार, 1 जुलाई को 75 साल के रामदेव का निधन हो गया। अरमान के परिवार और आसपास के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सहयोग करते हुए रामदेव की अर्थी तैयार की और कंधा देकर श्मशान तक ले गए। इसके बाद हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। इधर, रामदेव की मौत से अरमान का पूरा परिवार सदमे में है। बताया गया कि रामदेव के परिवार में कोई नहीं था। उसका सबकुछ अरमान और उनका परिवार ही था।
रामदेव साह के निधन के बाद मो. रिजवान ने कहा कि रामदेव साह को 25 साल पूर्व एक व्यक्ति लेकर आया था। उसने कहा कि काम के लिए ये भटक रहे हैं। मेरा दुकान बुद्धा प्लाजा में मदीना होजियरी के नाम से है। मैंने बगैर कुछ पुछे काम पर रख लिया था। रामदेव पढ़े लिखे थे। मेरे यहां एकाउंट देखते थे। उनके जाने से मेरे पुरे परिवार में शोक पसर गया है। वो परिवार के सदस्य थे हमारे लिए।
