बिहार के कटिहार जिले को बिहार के पिछड़े जिलों में गिना जाता है। लेकिन सही मायने में ये जिला पुरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है। क्योंकि जहां आज भी बेटी के जन्म पर समाज उतना खुश नहीं होता है, लेकिन बेटियां ही हैं जो समाज को आगे बढ़ाती है। और इसी कर्म में बिहार के कटिहार जिले में रहने वाले एक परिवार ने समाज को मिसाल पेश की है। News18 की एक खबर के मुताबिक एक ऐसी तस्वीर सामने आयी है जो बेटियों के जन्म को लेकर समाज की मानसिकता को बदलने की एक पहल है।
खबर के मुताबिक बेटी के जन्म से जुड़ी कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई है जो लोगों की सोच को बेटियों के प्रति बदलने का काम करेगी। बिहार के कटिहार जिले में एक बेटी के जन्म पर ऐसा जश्न मनाया गया कि सबकी बोलती बंद हो गयी है। जी हां, कटिहार के एक परिवार में बहू ने बेटी को जन्म दिया तो उसे ठीक उसी तरह घर लाया गया जैसे शादी के बाद कोई दुल्हन ससुराल आती है। बेटी को जन्म देने वाली स्नेहा को उनके ससुराल वालों ने डोली पर बिठा कर घर लाये। और नन्ही सी जान का जमकर स्वागत किया गया।
कटिहार के उत्सवनुमा माहौल में परिवार के लोगों अपनी पौत्री और पुत्र वधू का स्वागत जमकर किया। और बच्ची का नाम प्रांजल सुमन रखा गया। आपको बता दें कि बच्ची के पिता का नाम मयंक आर्यन है। जो मनरेगा में कार्यपालक सहायक हैं। जबकि बच्ची का मां स्नेहा कुमारी एक हाउस वाइफ हैं। बच्ची के जन्म पर स्नेहा की सास ममता कुमारी कहती हैं कि, “सरकार जो बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा बुलंद कर रही है, वो इसी संदेश को आगे बढ़ाना चाहती हैं। और इस अंदाज में बच्ची और बहु के स्वागत के पीछे उनका मकसद यहीं है कि समाज में भ्रूण हत्या जैसे अपराध को रोका जा सके।”

वहीं स्नेहा कहती हैं कि वो एक बार पहले भी बहू बनकर डोली में इस घर में आ चुकी हैं और अब अपनी बाटी के साथ घर में आने पर फिर से ऐसे स्वागत से वो बेहद खुश हैं। और हर किसी को ऐसा ससुराल मिले और हर बच्ची को ऐसे सोच रखने वाले परिजनों का अगर आशीर्वाद मिले तो सच में हर कोई यही कहेगा कि बार-बार लाडो इस देश में ऐसे आंगन में जरूर आना।

आपको बता दें कि इस मिसाल बने परिवार वालों को लेकर जिला परिषद अध्यक्ष रश्मि देवी ने कहा कि, “आज तक समाज में महिलाओं को परेशानी को लेकर कई पंचायती का हिस्सा बनने और उसे निदान करने का मौका मिला था लेकिन आज किसी के घर में बेटी जन्म होने पर इस तरह का स्वागत वाकई समाज के सामने एक बड़ा संदेश है। अगर किसी के घर मे बेटी के जन्म पर इस तरह से स्वागत और जश्न हो, तो समाज में सच मे बेटियों के लिए नजरिया बदलेगा।”
